रामनगर। कार्बेट पार्क में CM Dhami को सफारी कराने वाली जिस जिप्सी को लेकर विवाद हो रहा है, उसमें पहले भी दो बार राजयपाल व दो बार मुख्यमंत्री घूम चुके हैं। पहले के कार्बेट के निदेशकों ने भी इस संबंध में ध्यान नहीं दिया।
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जिप्सी को लेकर उठाए जा रहे सवाल के बीच एआरटीओ कार्यालय की तकनीकी टीम ने अपनी कई पैरामीटर की जांच में वर्ष 2018 माडल की जिप्सी पूरी तरह फिट पाई है। हालांकि कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा. साकेत बडोला की ओर से विभागीय कार्रवाई शुरू कर स्टोर कीपर व चालक से स्पष्टीकरण मांगा है।
रामनगर पहुंचे CM Dhami ने रविवार की सुबह कार्बेट पार्क व फाटो पर्यटन जोन में जिप्सी सफारी की थी। जिस जिप्सी में मुख्यमंत्री जंगल के भीतर घूमे थे, वह कार्बेट की वर्ष 2018 माडल की सरकारी जिप्सी है। जिप्सी की फिटनेस 2020 में खत्म हो चुकी थी। फिटनेस को लेकर विभाग की ओर से लापरवाही बरती गई।
वर्ष 2020 के बाद फिटनैस कराने के लिए विभाग ने ध्यान ही नहीं दिया। जबकि पहले इसी सरकारी जिप्सी में 2022 में कार्बेट आई उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य भी घूमी थी। इसके बाद उत्तराखंड के राज्यपाल जनरल गुरमीत सिंह भी इसी सरकारी जिप्सी में घूमे हैं। पिछले साल जनवरी में रामनगर आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी ढेला झिरना रेंज में इसी सरकारी जिप्सी से घूमे थे।
इस बार फिर से CM Dhami के इसी सरकारी जिप्सी से घूमने के बाद फिटनेस का मामला सुर्खियों में आ गया। कार्बेट ने अपनी सरकारी जिप्सी की फिटनेस जुलाई 2027 तक बढ़ा दी है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक ने बताया कि कार्बेट कार्यालय के संबंधित स्टोर कीपर व जिप्सी चालक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनसे पूछा गया हे कि समय पर जिप्सी की फिटनेस क्यों नहीं बढ़ाई गई है।
मानक पूरे होने के बाद ही होती है जिप्सी पंजीकृत CM Dhami
रामनगर: कार्बेट पार्क में पर्यटकों को सफारी कराने वाली प्राइवेट जिप्सियों के मानक पूरे होने के बाद ही पंजीकरण की कार्रवाई होती है। पर्यटकों को सफारी कराने वाली जिप्सियों के पंजीकरण के लिए फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, बीमा, आरसी होना अनिवार्य है। विभाग के पास 380 जिप्सियां पंजीकृत है। पंजीकरण वाली जिप्सियों से ही पर्यटकों को घूमने की अनुमति होती है।

