अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

महिलाओं का सम्मान केवल महिला दिवस पर नहीं, बल्कि साल में 365 दिन होना चाहिए : Atishi

On: March 9, 2025 10:55 AM
Follow Us:
Atishi
---Advertisement---

नयी दिल्ली: आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने कहा कि महिलाओं का सम्मान सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नहीं बल्कि साल में 365 दिन होना चाहिए।

Atishi ने महिलाओं को 2500 रुपये देने को लेकर रेखा गुप्ता को लिखा पत्र

Atishi ने आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर करोल बाग में आयोजित एक कार्यक्रम में आशा वर्करों और महिला सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा “महिलाओं का सम्मान सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नहीं, बल्कि साल में 365 दिन होना चाहिए। यह समझना सबके लिए जरूरी है।

Atishi लड़कियों को बराबरी का हक दिलाने में सबसे बडी भूमिका हमारी माताओं- बहनों का

 

 

पिछले 10-15 वर्षों में महिलाएं काफी आगे बढ़ी हैं, लेकिन आज भी यह सच्चाई है कि हमारे घरों में बेटी के पैदा होने पर कुछ लोग नाखुश जरूर होते हैं। 10 साल पहले जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी, तब दिल्ली के सरकारी स्कूल बहुत टूटे-फूटे थे। उस दौरान मैं एक बालिका स्कूल में जाकर लड़कियों से पूछा कि आप में से किस-किस के भाई प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। वहां मौजूद 90 फीसद लड़कियों ने बताया कि उनके भाई प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं।”

Atishi ने कहा “अगर परिवार में किसी एक बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने के पैसे होते थे तो लोग अपने बेटे को प्राइवेट स्कूल में और बेटियों को टूटे-फूटे सरकारी स्कूल में भेजते थे। आज भी हमारे देश की यह सच्चाई है। आज भी हमारे देश में बेटी को भार समझा जाता है।

उनके बचपन से ही माता-पिता सोच रहे होते हैं कि बेटी की शादी करनी होगी, दहेज में सामान देना होगा। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम सबको मिलकर काम करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वास्तव में हमारे शहर और पूरे देश में महिलाओं को बराबरी का हक दिया जाए। इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा।”

आप नेता ने कहा कि, “लड़कियों को बराबरी का हक दिलाने में सबसे बडी भूमिका हमारी माताओं- बहनों का है। हम महिलाएं बोलती हैं कि लड़कियां ये काम नहीं कर सकती हैं, ऐसे नहीं रहना चाहिए या यहां नहीं जाना चाहिए। हम ही कहीं न कहीं छोटी उम्र से ही लड़कियों में यह भाव पैदा करते हैं कि वह किसी तरह लड़कों से कम रहें।

आज अगर आज हमारे देश में लड़कियों के लिए समानता की कमी है तो उसके लिए महिलाएं भी जिम्मेदार हैं। अगर वास्तव में समाज में महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाना है तो हमें सबसे पहले इसकी शुरूआत अपने घरों से करनी होगी। तभी इस बदलाव की शुरूआत होगी।”

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!