Animal Slaughter Ban: बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की BJP सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक आदेश जारी करके पशु बलि पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब पशु वध सार्वजनिक स्लॉटर हाउस में नहीं किए जाएंगे। बल्कि पशुओं का वध अब केवल नगर पालिका की वधशाला या स्थानीय प्रशासन के द्वारा निर्दिष्ट वधशाला में ही किया जा सकेगा। फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना किसी पशु, मवेशी या भैंस के वध पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आदेश का उल्लंघन ने करने की चेतावनी भी दी गई है।
26 मई 2026 को मनाई जाएगी बकरीद
सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 और 2018 के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पशु वध पर बैन का आदेश जारी किया। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 26 मई को ईद उल-अजहा यानी बकरीद बनाई जाएगी। इस मौके पर बकरे की खुलेआम कुर्बानी दी जाती है, लेकिन बंगाल में अब ऐसा नहीं होगा। बकरीद से पहले ही पशु वध पर बैन लगा रहे हैं। अगर किसी ने आदेश का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिटनेस सर्टिफिकेट अब ऐसे जारी होगा
फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के नियम भी कड़े किए हैं। अब नई शर्तों पर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा और इसे अब नगर पालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ मिलका संयुक्त रूप से जारी करेंगे। दोनों अधिकारियों को सहमति से लिखित रूप में बताना होगा कि पशु वध करने के योग्य है। पशु की आयु 14 साल से ज्यादा, वृद्धावस्था, चोट, विकृति या लाइलाज बीमारी के कारण अक्षम हो तो ही पशु वध का सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
आदेश उल्लंघन पर सजा और जुर्माना दोनों
नए आदेश के अनुसार, सार्वजनिक स्लॉटर हाउस भी प्रतिबंधित रहेंगे। पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत पशु वध गंभीर अपराध होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर 6 महीने की जेल की सजा या 1000 रुपये जुर्माना या जेल-जुर्माना दोनों सजा हो सकती है। फिटनेस सर्टिफिकेट देने से मना करने पर पीड़ित 15 दिन के अंदर ही राज्य सरकार को शिकायत दे सकता है। इस तरह सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने ममता बनर्जी के राज को खत्म करने के लिए फैसलों की लाइन लगा दी है।

