Amroha News-गजरौला (अमरोहा): चैत्र माह के पावन मंगलवार के अवसर पर गजरौला शहर स्थित सिद्धपीठ प्राचीन माँ ललिता देवी मंदिर में सुबह से ही आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। वर्ष 1837 में स्थापित इस ऐतिहासिक और अत्यंत मान्यता प्राप्त मंदिर में श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर माता के दर्शन किए, प्रसाद चढ़ाया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान मेले जैसा माहौल रहा, लेकिन इस भीड़ के बीच यूपी पुलिस के मानवीय चेहरे ने सभी श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
लाइन में बेहोश हुई महिला, देवदूत बनी पुलिस
दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और लंबी कतार के बीच अचानक एक महिला की तबीयत बिगड़ गई और वह गश खाकर बेहोश हो गई। इससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी बीच वहां सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे एसएसआई (SSI) अमित प्रधान और दरोगा अनिल कुमार कौशिक ने गजब की तत्परता दिखाई।
बिना एक पल गंवाए दोनों पुलिस अधिकारी महिला के पास पहुंचे। उन्होंने तुरंत महिला को पानी पिलाया और महिला पुलिसकर्मियों की मदद से उसे भीड़भाड़ वाली लाइन से सुरक्षित बाहर निकालकर खुली हवा में कुर्सी पर बैठाया। जब महिला को थोड़ा आराम मिला और वह स्वस्थ महसूस करने लगी, तो पुलिस ने अपनी देखरेख में उसे दोबारा माता के दर्शन और पूजा-अर्चना संपन्न कराई। पुलिस के इस सेवा भाव और त्वरित मदद से अभिभूत होकर महिला ने पुलिस प्रशासन की जमकर सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया।
संतान प्राप्ति की मन्नतें होती हैं पूरी, हुए मुंडन संस्कार
प्राचीन माँ ललिता देवी मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई संतान प्राप्ति की हर मनोकामना माता रानी अवश्य पूर्ण करती हैं। इसी अगाध आस्था के चलते मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने नौनिहालों का मुंडन संस्कार कराने मंदिर पहुंचे और मन्नत पूरी होने पर खुशी-खुशी प्रसाद वितरित किया।
मेले में दिखी रौनक, सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
मंदिर परिसर के बाहर लगे मेले में भी भारी रौनक देखने को मिली। महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की और चाट-पकौड़ी समेत विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाया। इस पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। मंदिर परिसर से लेकर मेले तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा, जिससे दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

