अमरोहा (हसनपुर) | क्राइम/हेल्थ डेस्क जनपद अमरोहा के हसनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य महकमे की लचर व्यवस्था और झोलाछाप डॉक्टरों की मनमानी का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है। नगर के करनखाल मार्ग स्थित एक निजी क्लीनिक में कथित गलत इलाज के कारण 30 वर्षीय एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने जहां एक ओर जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर रसूख के दम पर इस संवेदनशील मामले को रफा-दफा करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं।
गलत इलाज से गई जान, बिलखते रह गए 5 मासूम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका का नाम संगीता (30 वर्ष) था, जो बाईखेड़ा मिलक निवासी जबर सिंह की पत्नी थीं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: इस कथित लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है। मृतका अपने पीछे तीन बेटियां, एक बेटा और एक नवजात मासूम बच्ची को रोता-बिलखता छोड़ गई है।
पांच मासूम बच्चों के सिर से अचानक मां का साया उठने के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है और अवैध क्लीनिकों के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।
समझौते का खेल: बिना कानूनी कार्रवाई के अंतिम संस्कार की तैयारी
इस घटना का सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक जान जाने के बावजूद मामले की लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है।
गुपचुप समझौता: क्षेत्र में तेजी से यह चर्चा फैल रही है कि मृतका के परिजनों और आरोपी क्लीनिक संचालक के बीच गुपचुप तरीके से ‘समझौते’ की बातचीत चल रही है।
सुबूत मिटाने की कोशिश: आरोप है कि बिना पुलिस को सूचना दिए, बिना किसी कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम के ही शव के अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आखिर कब तक ये झोलाछाप डॉक्टर मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ करते रहेंगे?
सीएचसी प्रभारी का बयान: “शिकायत मिलते ही होगी सख्त कार्रवाई”
इस पूरे घटनाक्रम पर जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हसनपुर के प्रभारी डॉ. ध्रुवेंद्र सिंह से बात की गई, तो उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
फिलहाल यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है और न ही उन्हें कोई औपचारिक शिकायत या सूचना मिली है।
उन्होंने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि जैसे ही इस मामले की सूचना या शिकायत प्राप्त होगी, तत्काल प्रभाव से जांच टीम गठित कर आरोपी क्लीनिक संचालक के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
क्या इंसाफ फाइलों में दफन हो जाएगा?
यदि स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने समय रहते इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेकर हस्तक्षेप नहीं किया, तो 5 मासूमों की मां की मौत का यह इंसाफ भी रसूख और चंद रुपयों के समझौते की फाइलों में हमेशा के लिए दफन होकर रह जाएगा।

