Amroha News-अमरोहा (20 मार्च 2026): अमरोहा के ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ ने एक बार फिर अपनी सार्थकता और संवेदनशीलता साबित की है। सेंटर के कर्मचारियों की सूझबूझ और कड़ी मेहनत की बदौलत घर से भागकर भटकी एक लावारिस बेटी अपने परिवार से दोबारा मिल सकी। पहचान और धर्म छिपाकर पुलिस को गुमराह कर रही इस लड़की को जब उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
रेस्क्यू और ‘लवली’ की झूठी कहानी
मामले की शुरुआत तब हुई जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF), थाना गजरौला ने सखी वन स्टॉप सेंटर को सूचना दी कि एक महिला लावारिस हालत में मिली है। महिला अपना नाम ‘लवली’ और पति का नाम ‘अनिल’ बता रही थी। सूचना मिलते ही सेंटर की केंद्र प्रबंधक ममता दुबे और नरेन्द्र पाल ने तुरंत रेस्क्यू कर उसे वन स्टॉप सेंटर में आश्रय दिया।
शुरुआती पूछताछ में लड़की ने पुलिस और सेंटर को गुमराह करते हुए बताया कि वह अपने पति के साथ कोटद्वार से दिल्ली घूमने निकली थी, लेकिन नजीबाबाद स्टेशन पर पति पानी लेने उतरा और ट्रेन छूट गई। उसने अपना पता भी कोटद्वार और बिजनौर के आसपास का बताया।
काउंसलिंग और जांच में सामने आया सच
वन स्टॉप सेंटर की टीम ने लड़की द्वारा बताए गए पतों (कोटद्वार और किशनगंज, बिहार) पर पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। कथित पति ‘अनिल’ ने भी फोन बंद कर लिया। इसके बाद केंद्र प्रबंधक श्रीमती ममता दुबे ने हार नहीं मानी। उन्होंने प्यार और सख्ती दोनों तरीकों से लड़की की काउंसलिंग की।
काफी प्रयास के बाद लड़की टूट गई और उसने अपना असली पता बिहार के सारण जिले में बताया। उसने यह भी कबूल किया कि वह एक मुस्लिम परिवार से है और उसका असली नाम मनीषा खातून है (पिता- साहेन दीन, माता- कूरैसा खातून)। उसने डर के कारण अपनी हिंदू पहचान (‘लवली’) बताई थी क्योंकि वह घर से भागकर आई थी और उसे डर था कि गांव में बदनामी होगी और पिता उसे मारेंगे।
सारण (बिहार) के सेंटर की मदद और भावुक पुनर्मिलन
सच्चाई सामने आने के बाद अमरोहा की टीम ने तत्काल जनपद सारण (बिहार) के वन स्टॉप सेंटर से संपर्क साधा, जिन्होंने परिवार को खोजने में काफी मदद की। बेटी की फोटो देखते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
बेटी के मिलने की खबर सुनते ही पिता साहेन दीन तुरंत अवध असम एक्सप्रेस पकड़कर अमरोहा पहुंच गए। पिता को देखते ही बेटी फूट-फूट कर रोने लगी। माता-पिता की आंखों से भी खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अंततः 20 मार्च 2026 को केंद्र प्रबंधक की निगरानी में मनीषा खातून को सुरक्षित उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। परिवार ने इस नेक कार्य के लिए अमरोहा प्रशासन और वन स्टॉप सेंटर का हृदय से आभार व्यक्त किया।

