Amroha Agriculture News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खेती अब और भी आसान और वैज्ञानिक होने जा रही है। अमरोहा स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय और भारत सरकार के उपक्रम इफको (IFFCO) ने संयुक्त रूप से “वैज्ञानिक ड्रोन विधि” का लाइव प्रदर्शन किया। इस तकनीक के जरिए किसानों को कम लागत में दोगुनी पैदावार प्राप्त करने के गुर सिखाए गए।
6 मिनट में 2 एकड़ फसल पर यूरिया का छिड़काव
विश्वविद्यालय के कृषि शोध संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक की शक्ति का सजीव प्रदर्शन (Live Demo) किया गया।
अभूतपूर्व गति: ड्रोन की मदद से गेहूँ की फसल में मात्र 6 मिनट में 2 एकड़ क्षेत्र में नैनो यूरिया का छिड़काव किया गया।
कीटनाशक स्प्रे: मात्र 10 मिनट में 10 बीघा फसल पर कीटनाशक का सफलतापूर्वक छिड़काव कर तकनीक की सटीकता को साबित किया गया।
खेती में ड्रोन के क्रांतिकारी लाभ
इफको के विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि अमेरिका और कनाडा की तर्ज पर अब भारतीय किसान भी हाई-टेक बनेंगे। ड्रोन तकनीक से निम्नलिखित लाभ होंगे:
सटीक छिड़काव: उर्वरकों और कीटनाशकों का समान और प्रभावी वितरण।
मृदा विश्लेषण: मिट्टी की उर्वरा शक्ति की सटीक जांच और मैपिंग।
लागत में कमी: समय की बचत के साथ-साथ रसायनों की बर्बादी पर रोक।
फसल निगरानी: ड्रोन के जरिए पूरी फसल की सेहत पर नजर रखी जा सकेगी।
‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनेगा वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय
वेंक्टेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष श्री सुधीर गिरि के प्रतिनिधि डॉ. राजीव त्यागी ने रिमोट का बटन दबाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय के कृषि शोध संस्थान को “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ नवाचारों के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
तकनीकी प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएं (Quick Facts)
| तकनीक | क्षमता/परिणाम |
| नैनो यूरिया छिड़काव | 6 मिनट में 2 एकड़ |
| कीटनाशक स्प्रे | 10 मिनट में 10 बीघा |
| प्रमुख सहयोगी | IFFCO (इफको) और SVU |
| उद्देश्य | किसानों की आय दोगुनी करना और लागत घटाना |
इन विशेषज्ञों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में इफको के क्षेत्राधिकारी डॉ. अभीत गोस्वामी, डीन एग्रीकल्चर डॉ. थॉमस एब्राहम, डॉ. शेषनाथ मिश्रा, डॉ. महकार सिंह सहित मेरठ और अमरोहा परिसर के कई वैज्ञानिक और शिक्षाविद् मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी विश्वास राणा ने बताया कि इस तकनीक को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए विश्वविद्यालय विशेष अभियान चलाएगा।

