नई दिल्ली,। देश में हवाई यात्रा को सुरक्षित, सुगम और यात्री-अनुकूल बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एक अहम कदम उठाया है। CISF के एयरपोर्ट सेक्टर मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय कार्यशाला में हवाई अड्डा सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला में हवाई अड्डों की सुरक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावशाली और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर दिया गया।
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कार्यशाला में CISF अधिकारियों के अलावा नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए, बीसीएएस, एएआई, दिल्ली पुलिस, बीओआई, एसपीजी, एनएसजी, एयरलाइंस और निजी एयरपोर्ट ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
हवाई अड्डों में अब फेस रिकग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान, फास्टैग इंटीग्रेशन और बायोमेट्रिक एईपी जैसी तकनीकों के उपयोग से प्रवेश प्रक्रिया और सुरक्षा जांच को तेज और निर्बाध बनाया जाएगा। इससे यात्रियों को लंबी कतारों से निजात मिल सकती है।
सभी एयरपोर्ट स्टाफ-सुरक्षा से लेकर एयरलाइन कर्मियों तक को एकीकृत और समन्वित प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे यात्रियों को हर टचपॉइंट पर बेहतर और एक समान अनुभव मिलेगा। छोटे शहरों में नए सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थानों की योजना भी तैयार की जा रही है।
लेयर्ड प्रोटेक्शन, एंटी-ड्रोन रणनीतियां और इंटर्नल थ्रेट्स की पहचान जैसे उपायों से वीआईपी और विशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा को और सख्त किया जाएगा, जबकि सामान्य यात्रियों के अनुभव पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
CISF के एयरपोर्ट सेक्टर मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय कार्यशाला में हवाई अड्डा सुरक्षा से जुड़े तमाम प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया
सभी एजेंसियों ने एक मानवीय और जवाबदेह शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने की बात कही। एयरसेवा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए यात्रियों की शिकायतों का रियल-टाइम समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

