गाजियाबाद। मशहूर राम कथा वाचक मुरारी बापू अपनी पत्नी के निधन के दो दिन बाद ही धार्मिक अनुष्ठान संबंधी गतिविधियां करने की वजह से विवादों में हैं। Acharya Pramod Krishnam ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि विवाद को संवाद से सुलझाया जाना चाहिए।
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Acharya Pramod Krishnam ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद मेंकहा, “मुरारी बापू रामकथा के मर्मज्ञ हैं और कथाओं के हिमालय हैं। रामकथा के माध्यम से उन्होंने सनातन की बहुत सेवा की है। उनकी पत्नी के निधन का समाचार मुझे मिला है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें इस दुख को सहने का धैर्य और शक्ति प्रदान करे।”
Acharya Pramod Krishnam ने कहा कि जहां तक काशी विश्वनाथ के दर्शन करने और वाराणसी में रामकथा कहने पर विवाद है, यह विषय काशी के धर्माचार्यों और विद्वत परिषद ने उठाया है। वह धर्म के प्रकांड विद्वानों का समूह है। मुझे विवाद के विषय में पूर्ण जानकारी नहीं है। पूरी जानकारी मिलने के बाद ही मैं इस विषय पर कुछ बोल पाऊंगा। फिलहाल मैं दोनों पक्षों से यही कहूंगा कि “संवाद से विवाद का हल” निकालें।
हिंदू धर्म के मुताबिक, किसी की मृत्यु के बाद जब तक उसका श्राद्ध कर्म नहीं हो जाता, उसके परिवार के लोग पूजा-पाठ जैसी गतिविधियों से दूर रहते हैं। पूरे परिवार पर श्राद्ध कर्म नहीं होने तक सूतक दोष होता है। मुरारी बापू की पत्नी नर्मदाबा का निधन 11 जून को हो गया।
Acharya Pramod Krishnam मुरारी बापू रामकथा के मर्मज्ञ हैं और कथाओं के हिमालय हैं
लेकिन, वह 14 जून को ही वाराणसी रामकथा करने पहुंचे। रामकथा से पहले उन्होंने काशी विश्वनाथ में दर्शन और पूजन किया। इसे लेकर काशी के विद्वानों ने उन पर सवाल उठाए और सनातन धर्म के नियमों की अवहेलना का आरोप लगाया।

