अमरोहा : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। खासकर अमरोहा जिले की बहुचर्चित हसनपुर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 42) के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) द्वारा अपने उम्मीदवार के ऐलान के बाद क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से सबसे बड़ा झटका बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पारंपरिक वोट बैंक को लग सकता है।
बसपा के सामने बड़ी चुनौती
हसनपुर सीट पर हमेशा से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है। यहां दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े व सवर्ण मतदाताओं का समीकरण ही जीत और हार तय करता है। ऐसे में, आजाद समाज पार्टी द्वारा मैदान में उम्मीदवार उतारने से सीधे तौर पर बसपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो बसपा का पुराना चुनावी गणित बिगड़ सकता है और पार्टी को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।
त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय हो सकता है मुकाबला
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आजाद समाज पार्टी के कैडर बेस और आक्रामक युवाओं के समर्थन को देखते हुए यह चुनाव केवल पारंपरिक दलों तक सीमित नहीं रहेगा। चुनाव अब बहुकोणीय संघर्ष की ओर बढ़ रहा है, जहां हर एक वोट की कीमत होगी। यदि आजाद समाज पार्टी यहां अच्छा प्रदर्शन करती है, तो वह अन्य प्रमुख दलों के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन सबसे ज्यादा असमंजस की स्थिति बसपा के पाले में दिख रही है।
जनता और मतदाताओं का मूड
क्षेत्र के मतदाताओं के बीच अब यही चर्चा है कि नया राजनीतिक विकल्प किस हद तक पारंपरिक दलों के वोटों में सेंध लगा पाएगा। आने वाले दिनों में और भी दलों के रुख साफ होने के बाद तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल हसनपुर 42 का राजनीतिक रण बेहद दिलचस्प होता नजर आ रहा है। अभी देखते हैं आगे आगे होता है क्या?

