देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित समारोह में साहित्यकारों, लेखकों और हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है, जिसने देश में ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत किया है।
समारोह की मुख्य बातें व घोषणाएं:
आधुनिक तकनीक से जोड़ें हिंदी: मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि आज के डिजिटल युग में हिंदी को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, विज्ञान और शोध की मजबूत भाषा बनाया जाए।
साहित्यकारों को सम्मान व पुरस्कार:
जीवन भर साहित्य साधना करने वालों को ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत 5 लाख रुपये।
उत्कृष्ट रचनाकारों को ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के तहत 5 लाख 51 हजार रुपये की राशि।
हिंदी के साथ गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू के लेखकों को ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’।
साहित्यिक धरोहर व बोलियों का संरक्षण: सीएम ने राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, चंद्रकुंवर बर्त्वाल और प्रसून जोशी के योगदान को याद किया। उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, भोटिया और थारू जैसी क्षेत्रीय लोकभाषाओं के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
‘बुके नहीं, बुक देंगे’ पहल: राज्य में पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस पहल पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, भाषा संस्थान के माध्यम से रचनाकारों को पुस्तक प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान और अप्रकाशित साहित्य को सहेजने का कार्य किया जा रहा है।
समारोह में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंचों पर नई प्रतिष्ठा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की भी सराहना की। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, सचिव भाषा विभाग उमेश नारायण पांडे और निदेशक मायावती ढकरियाल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

