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खड़े हनुमान को क्यों कहते हैं डॉक्टर, जानें मूर्ति इतिहास-मान्यता

On: September 11, 2026 10:04 AM
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आपने उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर से जुड़े हालिया विवाद और इसके ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के बारे में बहुत विस्तृत और सटीक जानकारी साझा की है। यह मामला आस्था, इतिहास और आधुनिक विकास के बीच के टकराव का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।

इस पूरे घटनाक्रम और जानकारी को अगर व्यवस्थित रूप से मुख्य बिंदुओं में समझें, तो स्थिति इस प्रकार है:

1. विवाद का मुख्य कारण (सिंहस्थ कुंभ 2028)

  • क्या है योजना: उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए प्रशासन सड़कों का चौड़ीकरण कर रहा है।

  • समस्या: कंथल चौराहे और छतरी चौक के बीच सती गेट की मुख्य सड़क पर स्थित इस प्राचीन मंदिर को विकास कार्य के लिए विस्थापित करने की योजना बनाई गई है।

  • विरोध: स्थानीय लोग इस विस्थापन के सख्त खिलाफ हैं। उनकी मांग है कि मंदिर को हटाया न जाए, बल्कि इसी स्थान पर इसे और अधिक भव्य रूप दिया जाए।

2. तकनीकी अड़चन और चमत्कार की भावना

  • प्रशासन ने मूर्ति को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), IIT और अन्य इंजीनियरिंग टीमों की मदद ली, लेकिन वे सभी अब तक विफल रहे हैं।

  • स्थानीय लोग इसे बजरंगबली का ‘चमत्कार’ मान रहे हैं कि कोई भी मशीन या तकनीक उन्हें उनके स्थान से डिगा नहीं पा रही है।

3. मूर्ति की संरचना और ‘इंटरलॉक’ तकनीक

  • बनावट: यह मूर्ति जमीन के ऊपर लगभग 8 फीट की है, लेकिन इसकी नींव कितनी गहरी है, इसका सटीक अनुमान कोई नहीं लगा पाया है।

  • तकनीकी चुनौती: विशेषज्ञों (जैसे डॉ. रमण सोलंकी) के अनुसार, प्राचीन काल में बड़ी और भारी मूर्तियों को ‘इंटरलॉक तकनीक’ से स्थापित किया जाता था और संभवतः इसे एक ही विशाल पत्थर को तराश कर बनाया गया है। सीधे खींचकर निकालने से मूर्ति के खंडित होने का भारी जोखिम है।

4. ‘डॉक्टर हनुमान’ और उज्जैन का एम्स

  • धार्मिक रूप से इस मंदिर की गहरी मान्यता है। स्थानीय लोग इसे ‘उज्जैन का एम्स’ (AIIMS) और भगवान को ‘डॉक्टर हनुमान’ कहते हैं।

  • मान्यता है कि यहां दर्शन करने और मन्नत मांगने से बच्चों और बड़ों की गंभीर बीमारियां व कष्ट दूर हो जाते हैं।

5. 1000 साल पुराना इतिहास

  • आम धारणा है कि यह मूर्ति 170 साल पहले स्थापित की गई थी।

  • हालांकि, इतिहासकारों का मानना है कि यह परमार कालीन (लगभग 1000 साल पुरानी) हो सकती है और इसका संबंध राजा भोज के काल से हो सकता है, जो इसके पुरातात्विक महत्व को और बढ़ा देता है।

फिलहाल प्रशासन ने दबाव और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए तय किया है कि आगे का कोई भी कदम स्थानीय लोगों की सहमति और बातचीत के बाद ही उठाया जाएगा।

 

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