सड़क किनारे मिलने वाले मोमोज के साथ परोसी जाने वाली लाल चटनी आपकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। एशियन फूड साइंस की एक रिसर्च और हाल ही में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाइयों में इसके माइक्रोबायोलॉजिकल स्तर पर बेहद असुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।
रिसर्च और प्रशासनिक कार्रवाई
दिल्ली की रिसर्च: एशियन फूड साइंस द्वारा दिल्ली के स्ट्रीट फूड पर की गई रिसर्च में मोमोज के 20 सैंपल में से केवल 9 खाने लायक पाए गए। वहीं, चटनी के सभी 20 सैंपल जांच में फेल हो गए और उन्हें इंसानों के खाने योग्य नहीं माना गया।
हानिकारक बैक्टीरिया: इन चटनियों में ‘ई कोलाई’ और ‘स्टेफिलोकोकस’ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो आंतों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं।
कानपुर में कार्रवाई: हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर में फूड सेफ्टी विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब 115 किलो मिलावटी लाल चटनी को नष्ट किया है।
चटनी को खतरनाक बनाने वाली मिलावट
आर्टिफिशियल लाल रंग: चटनी को आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल होता है, जिससे स्किन एलर्जी और बच्चों में स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG): स्वाद बढ़ाने के लिए इसका धड़ल्ले से उपयोग होता है। इसके लगातार सेवन से सिरदर्द, मतली, बेचैनी और पेट से जुड़ी बीमारियां होती हैं।
अत्यधिक लाल मिर्च: तीखेपन और रंग के लिए जरूरत से ज्यादा लाल मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है, जो पेट और पाचन तंत्र के लिए हानिकारक है।
केमिकल स्टेबलाइजर: चटनी को गाढ़ा और लंबे समय तक फ्रेश दिखाने के लिए इसमें जैंथिन गम और केराजीनन जैसे स्टेबलाइजर मिलाए जाते हैं। इनसे पेट फूलने और दर्द की शिकायत होती है।
बचाव और सावधानियां
सड़क किनारे खुले में लंबे समय तक रखी गई चटनी खाने से पूरी तरह बचें।
मोमोज खाने के लिए ऐसे स्थानों का चुनाव करें जहां फूड काउंटर और बर्तन पूरी तरह साफ हों।
यदि चटनी के स्वाद, रंग या महक में कोई भी असामान्य बदलाव लगे, तो उसका सेवन तुरंत रोक दें।
घर पर मोमोज बनाते समय ताजी सामग्री का उपयोग करें और किसी भी प्रकार के फूड कलर को मिलाने से बचें।
बाहर मोमोज या चटनी खाने के बाद पेट खराब होने, उल्टी, दस्त या बुखार जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

