उत्तर प्रदेश के सियासी पटल पर मंगलवार का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर की धरती से समाजवादी पार्टी पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। विकास योजनाओं की झड़ी लगाते हुए CM Yogi in Rampur में पूरे रौ में नजर आए। उन्होंने जिले को 690 करोड़ रुपये से अधिक की जनहितकारी परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी। लेकिन इस भव्य शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा उनके उस राजनीतिक प्रहार की हो रही है, जिसने सीधे तौर पर पिछली सरकारों के कामकाज की बखिया उधेड़ कर रख दी।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में 2017 से पहले और आज के उत्तर प्रदेश की तस्वीर के बीच एक गहरी लकीर खींच दी। उन्होंने मंच से साफ शब्दों में आरोप लगाया कि पूर्व की सरकारों में विकास का मतलब सिर्फ दो परिवारों तक सीमित था। दरअसल, उनका सीधा इशारा समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी सैफई परिवार और रामपुर के कद्दावर नेता (बिना नाम लिए) के परिवार की तरफ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि तब आम जनता विकास के लिए तरसती थी, अन्नदाता किसान आत्महत्या को मजबूर थे, जबकि सरकारी खजाने का मुंह केवल इन दो खास परिवारों के लिए खुलता था।
CM Yogi in Rampur: ‘चाचा-भतीजे’ की वसूली और रामपुरी चाकू का जिक्र
पूर्ववर्ती सपा सरकार को घेरते हुए योगी ने रोजगार और कानून व्यवस्था का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि एक वक्त था जब यूपी में कोई भी सरकारी भर्ती निकलती थी, तो ‘चाचा-भतीजे’ की जोड़ी झोला लेकर वसूली पर निकल पड़ती थी। नौबत यहां तक आ जाती थी कि न्यायालय को कड़ा रुख अपनाकर ऐसी भर्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। असल में, मुख्यमंत्री का यह बयान उस दौर की याद दिलाता है जब प्रदेश में नौकरियों को लेकर भारी भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगते थे।
इसी बीच उन्होंने रामपुरी चाकू का बेहद दिलचस्प और मारक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हथियार अगर गलत व्यक्ति के हाथ में पड़ जाए, तो वह डकैती और हत्या का जरिया बन जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सपा शासनकाल में इसी चाकू के दम पर जनता को प्रताड़ित किया जाता था और उनकी जमीनों पर कब्जे होते थे। लेकिन आज जब सूबे में डबल इंजन की सरकार है, तो वही रामपुरी चाकू आम जनता की सुरक्षा और विकास का सबसे बड़ा हथियार बन गया है।
कांवड़ यात्रा और त्योहारों पर पाबंदी वाले दिन अब लद गए
कानून व्यवस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भी योगी पूरे फॉर्म में दिखे। उन्होंने जनता को याद दिलाया कि कैसे 2017 से पहले प्रदेश में पहचान का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। कोई भी त्योहार शांति से नहीं मनता था। जन्माष्टमी से लेकर कांवड़ यात्रा तक पर पाबंदियां थोप दी जाती थीं और उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाते थे।
आज हालात बिल्कुल जुदा हैं। बताया जा रहा है कि सरकार की स्पष्ट नीतियों के कारण अब यूपी में दुर्गा पूजा, रामनवमी, होली, दीवाली और कांवड़ यात्रा बिना किसी रोक-टोक और पूरे हर्षोल्लास के साथ संपन्न होती है। बहन-बेटियां और व्यापारी अब खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं। यह वही उत्तर प्रदेश है जहां पहले दंगों के खौफ में लोग घरों में कैद रहने को मजबूर थे, लेकिन आज पूरा प्रदेश एक उत्सवपूर्ण माहौल में सांस ले रहा है।
रामभक्तों पर गोली चलाने वालों को अब याद आ रहे हैं भगवान राम
मुख्यमंत्री ने अयोध्या, काशी और मथुरा के बदलते भव्य स्वरूप का जिक्र करते हुए विपक्ष की वर्तमान बेचैनी पर भी करारी चुटकी ली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग 2017 से पहले जय श्री राम बोलने वालों पर लाठियां और रामभक्तों पर गोलियां बरसाते थे, आज वे खुद को सबसे बड़ा आस्थावान साबित करने की होड़ में लगे हैं। यह आम जनता के वोट बैंक और आस्था की ही ताकत है कि कल तक भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को नकारने वाली कांग्रेस और सपा आज अयोध्या जाने के लिए मचल रही है।
विपक्ष की मानसिकता को ‘कालनेमि’ राक्षस के छल-कपट से जोड़ते हुए योगी ने कहा कि राम की सच्ची भक्ति में वो शक्ति है, जो ऐसे हर धोखेबाज को निपटाने में सक्षम है। विपक्ष की असली खीज और चिढ़ तो विकास को लेकर है। उन्हें इस बात से परेशानी है कि अयोध्या इतनी खूबसूरत कैसे हो गई, काशी विश्वनाथ धाम और मां विंध्यवासिनी का दरबार इतना भव्य कैसे हो गया, और प्रयागराज का महाकुंभ आज पूरी दुनिया को अपनी ओर कैसे आकर्षित कर रहा है।
अंत में, मुख्यमंत्री का यह पूरा संबोधन महज एक सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की जनता के बीच एक साफ और मजबूत नैरेटिव सेट करने की बड़ी कोशिश थी। योगी आदित्यनाथ ने रामपुर से यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उनकी सरकार में तुष्टिकरण और गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं है, और यूपी के विकास की रफ्तार अब किसी परिवार विशेष की मोहताज नहीं रहेगी।

