Amroha News -लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद अब उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों में भी प्रशासन की नींद टूटती नजर आ रही है। इसी कड़ी में अब अमरोहा जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। जिले में किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने और लोगों की जान सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
दरअसल, अमरोहा के जिलाधिकारी नितिन गौड़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रवैया अपनाया है। डीएम ने जिले भर में बिना फायर एनओसी (NOC) और आग बुझाने के पर्याप्त इंतजामों के चल रहे तमाम संस्थानों के खिलाफ एक विशेष जांच अभियान चलाने का आदेश जारी कर दिया है। प्रशासन का साफ कहना है कि जनता की सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लखनऊ अग्निकांड से प्रशासन ने लिया सबक (Amroha Fire Safety Action)
अक्सर देखा जाता है कि जब कहीं कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तब जाकर सिस्टम जागता है। लखनऊ के अग्निकांड ने भी कुछ ऐसा ही काम किया है। इस दर्दनाक घटना के बाद अमरोहा प्रशासन सतर्क हो गया है ताकि उनके जिले में ऐसी कोई त्रासदी न दोहराई जाए। अमरोहा में इस Amroha Fire Safety Action के तहत अब शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।
डीएम नितिन गौड़ ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे ग्राउंड जीरो पर उतरकर खुद हालात का जायजा लें। असल में, उन इमारतों पर विशेष फोकस किया जा रहा है जहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है, लेकिन वहां से बाहर निकलने के आपातकालीन रास्ते या आग बुझाने के उपकरण मौजूद नहीं होते हैं।
रडार पर बिना NOC वाले कोचिंग सेंटर और रेस्टोरेंट
स्थानीय प्रशासन की सबसे ज्यादा नजर उन कोचिंग सेंटरों, शिक्षण संस्थानों, होटलों और रेस्टोरेंट पर है जो नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि शहर में ऐसे कई कोचिंग सेंटर और कमर्शियल बिल्डिंग्स हैं, जो तंग गलियों या बेसमेंट में बिना किसी सुरक्षा मानक के संचालित हो रहे हैं।
अक्सर हम देखते हैं कि शहरों में होटलों और रेस्टोरेंट के किचन से लेकर सीटिंग एरिया तक, सुरक्षा के नाम पर भारी लापरवाही बरती जाती है। वहीं, कोचिंग सेंटरों का हाल तो और भी बुरा होता है। एक छोटे से कमरे में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर पढ़ाई करवाई जाती है। ऐसे में अगर कभी शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह से आग लग जाए, तो वहां से सुरक्षित बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
अब इन सभी जगहों की सघन चेकिंग की जाएगी। जांच टीम यह देखेगी कि इन कमर्शियल जगहों के पास फायर डिपार्टमेंट से मिली एनओसी (NOC) है या नहीं। अगर किसी संस्थान में आग बुझाने के यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर), स्मोक अलार्म और इमरजेंसी एग्जिट जैसे बुनियादी सुरक्षा इंतजाम नहीं पाए गए, तो उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नियम तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज, सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
प्रशासन ने साफ चेतावनी दे दी है कि जो भी व्यक्ति या संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया जाएगा, उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे संस्थानों को सील करने और उनके मालिकों पर भारी मुकदमा व जुर्माना लगाने की भी तैयारी है। डीएम का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि मुनाफा कमाने के चक्कर में आम लोगों और मासूम बच्चों की जिंदगी दांव पर नहीं लगाई जा सकती।
यह चेकिंग अभियान निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है, लेकिन अब देखना यह होगा कि यह अभियान सिर्फ कुछ दिनों की कागजी कार्रवाई बनकर रह जाता है, या फिर सच में अमरोहा की सड़कों पर इसका जमीनी असर देखने को मिलता है। खैर, प्रशासन की इस सख्ती के बाद फिलहाल जिले के उन होटल और कोचिंग संचालकों में हड़कंप जरूर मच गया है, जो अब तक बिना किसी डर के फायर सेफ्टी मानकों की धज्जियां उड़ा रहे थे।

