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हरिद्वार में विराजे 5210 किलो के ‘पारदेश्वर महादेव’, दर्शनों के लिए उमड़ा सैलाब

On: June 18, 2026 8:31 AM
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हरिद्वार। देवभूमि और धर्मनगरी हरिद्वार (Haridwar) में एक ऐतिहासिक और अद्भुत आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ है। यहां पूरे विधि-विधान, यज्ञ और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 5210 किलोग्राम वजन वाले ‘पारदेश्वर महादेव’ (Parad Shivling) की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। इस कार्यक्रम के आयोजकों और संत समाज का दावा है कि यह विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है। इस अलौकिक शिवलिंग की स्थापना और दर्शनों के लिए देशभर से श्रद्धालुओं और शिव भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा।

प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में दिखा अद्भुत उत्साह

इस विशालकाय और अद्वितीय शिवलिंग की स्थापना का कार्यक्रम बेहद भव्य और दिव्यता से परिपूर्ण रहा:

  • वैदिक अनुष्ठान: देश के जाने-माने विद्वान पंडितों और आचार्यों द्वारा कई दिनों तक चले विशेष यज्ञ, रुद्राभिषेक और वैदिक मंत्रोच्चार के बाद इस शिवलिंग को पूरे विधि-विधान के साथ विराजमान किया गया।

  • हर-हर महादेव का जयघोष: प्राण-प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा।

  • साधु-संतों की मौजूदगी: इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए विभिन्न अखाड़ों के महामंडलेश्वर, प्रतिष्ठित संत समाज और हजारों की संख्या में शिव भक्त उपस्थित रहे।

विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग: आयोजकों का दावा

आयोजन समिति से जुड़े पदाधिकारियों और संतों ने इस शिवलिंग के निर्माण और इसकी विशेषताओं को लेकर कई अहम जानकारियां साझा कीं:

  • 5210 किलो है वजन: इस पारद शिवलिंग का कुल वजन 5210 किलोग्राम (5.2 टन से अधिक) है।

  • कठिन निर्माण प्रक्रिया: पारे (Mercury) को ठोस रूप में ढालना एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय विज्ञान की विशेष तकनीकों का इस्तेमाल करके तरल पारे को जड़ी-बूटियों की मदद से बांधकर यह विशाल ठोस आकार दिया गया है।

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: आयोजकों के अनुसार, इतने अधिक वजन और इतने विशाल आकार का पारद शिवलिंग वर्तमान में पूरे विश्व में कहीं और मौजूद नहीं है। यह हरिद्वार और पूरे सनातन धर्म के लिए एक बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि है।

क्या है पारद शिवलिंग का धार्मिक महत्व?

सनातन धर्म और विशेषकर ‘शिव पुराण’ (Shiv Puran) में पारद (पारे) से बने शिवलिंग का अत्यंत पवित्र और सर्वोच्च स्थान बताया गया है:

  • भगवान शिव का प्रत्यक्ष स्वरूप: शास्त्रों में पारे को भगवान शिव का ही साक्षात अंश माना जाता है। इसलिए पारद शिवलिंग की पूजा को सबसे शीघ्र फलदायी कहा गया है।

  • दर्शन मात्र से पापों का नाश: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां साधारण शिवलिंग की लंबी पूजा-अर्चना से जो पुण्य मिलता है, वह पारद शिवलिंग के केवल दर्शन या स्पर्श मात्र से प्राप्त हो जाता है।

  • सुख-समृद्धि और मोक्ष: ऐसा माना जाता है कि पारदेश्वर महादेव की आराधना करने से मनुष्य को आरोग्य, ऐश्वर्य, अकाल मृत्यु से रक्षा और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हरिद्वार में स्थापित हुए इस विशालकाय पारदेश्वर महादेव के दर्शनों के लिए अब प्रतिदिन हजारों की संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की उम्मीद है। यह अद्भुत शिवलिंग अब धर्मनगरी हरिद्वार में शिव भक्तों की आस्था और आकर्षण का एक नया व प्रमुख केंद्र बन गया है।

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