समर इंडिया , सवाददाता जावेद चौधरी
Amroha News-उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से डिजिटल ई-रजिस्ट्री लागू करने के प्रस्ताव के विरोध में हसनपुर तहसील बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) हिमांशु उपाध्याय को सौंपा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी गजेंद्र सिंह एडवोकेट ने बताया कि महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश सरकार (लखनऊ) द्वारा 4 जून को पत्रांक संख्या 2523 के तहत जारी आदेश में प्राइवेट कंपनियों को ठेके पर देकर डिजिटल ई-रजिस्ट्री कराने की योजना प्रस्तावित की गई है।अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो प्रदेश के लाखों अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों, मुंशियों और टाइपिस्टों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।बार एसोसिएशन के नेतृत्व में अधिवक्ता 11 जून से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं और इस जनविरोधी नीति को तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांगों में 4 जून को जारी आदेश को निरस्त करना तथा रजिस्ट्री कार्य को किसी भी निजी कंपनी को सौंपने के निर्णय को वापस लेना शामिल हैअधिवक्ताओं ने यह भी मांग की कि रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखते हुए वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था को ही सुचारू रूप से जारी रखा जाए।
इसके अलावा, अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्य से जुड़े सभी वर्गों के वैधानिक अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही प्रदेश में ‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’ को तत्काल लागू करने की भी मांग उठाई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान महासचिव ब्रजकिशोर एडवोकेट, चरन सिंह, महबूब आलम, मुजाहिद चौधरी, हितेश त्यागी, मनोज कुमार सक्सेना, दिनेश कुमार प्रजापति, चंद्रसेन अग्रवाल, मंगल सेन शर्मा, विशाल शर्मा, वीर सिंह त्यागी, महावीर सिंह, नन्हे सिंह, होमपाल सिंह, जय राणा और सुरेश सैनी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता व स्टांप वेंडर मौजूद रहे।

