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ग्लोबल फैटी लिवर दिवस आज, हर साल 11 जून को मनाया जाता है ग्लोबल फैटी लिवर दिवस।

On: June 11, 2026 7:23 PM
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ग्लोबल फैटी लिवर दिवस आज, हर साल 11 जून को मनाया जाता है ग्लोबल फैटी लिवर दिवस।

जानिए डॉ. अमोल गुप्ता से लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय।

जानिए फैटी लिवर रोग और इसके होम्योपैथी उपचार के बारे में।

समर इंडिया की कुशल एवं अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ अमोल गुप्ता से हुई खास बातचीत की अंश।

फैटी लिवर रोग (Fatty Liver Disease) आजकल एक आम समस्या बन चुकी है।जब लिवर में अत्यधिक वसा (फैट) जमा हो जाती है, तो यह स्थिति उत्पन्न होती है। सामान्य रूप से लिवर में थोड़ी-सी वसा होती है, लेकिन जब यह लिवर के वजन का 5% से 10% तक पहुँच जाती है, तब इसे फैटी लिवर कहा जाता है।अधिकतर मामलों में फैटी लिवर गंभीर लक्षण नहीं दिखाता और लिवर सामान्य रूप से काम करता रहता है।लेकिन लगभग 7% से 30% मरीजों में यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है और तीन चरणों से होकर गुजरता है–

लिवर में सूजन (Inflammation) – जिससे ऊतक (Tissues) को क्षति पहुँचती है।

फाइब्रोसिस (Fibrosis) – लिवर के क्षतिग्रस्त हिस्से पर निशान (Scar Tissue) बनना।

सिरॉसिस (Cirrhosis) – जब स्वस्थ ऊतक को पूरी तरह से निशान ऊतक (Scar Tissue) बदल देता है।

लक्षण (Symptoms)
फैटी लिवर के मरीजों में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन रोग बढ़ने पर निम्न संकेत दिखाई दे सकते हैं –

पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन

भूख न लगना, मितली या अचानक वजन घटना

पीलिया (त्वचा और आँखें पीली होना)

पेट और पैरों में सूजन

अत्यधिक थकान, कमजोरी या मानसिक भ्रम

पाचन संबंधी गड़बड़ियाँ

होम्योपैथी में उपचार (Homeopathy Medicines for Fatty Liver)
होम्योपैथी एक समग्र (Holistic) चिकित्सा पद्धति है, जो मानसिक, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर संतुलन स्थापित करने में मदद करती है। फैटी लिवर रोग में कई प्रभावी होम्योपैथिक दवाएँ उपलब्ध हैं। दवा का चयन मरीज के व्यक्तित्व, मानसिक स्थिति और शारीरिक लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

नीचे कुछ प्रमुख औषधियाँ दी जा रही हैं –

1. Bryonia Alba
लिवर भारी, सूजा और दर्दयुक्त।

दाहिनी करवट लेटने से आराम।

कड़वा स्वाद, कब्ज या ढीला, पतला दस्त।

2. Chelidonium Majus
लिवर बड़ा और कोमल, दर्द दाहिने कंधे तक फैलता है।

गर्म पेय और भोजन से आराम।

भेड़ की बीट जैसे छोटे-छोटे सख्त गोले जैसे मल।

3. Cardus Marianus
लिवर के बाएँ हिस्से में संवेदनशीलता।

कब्ज, कठोर और गांठदार मल।

सुनहरी रंग का पेशाब मुख्य लक्षण।

4. Calcarea Carbonica
मोटे-थुलथुले, पेट व लिवर में फैट अधिक।

दूध न पचना, अंडों की असामान्य इच्छा।

सिर पर अत्यधिक पसीना।

5. Lycopodium Clavatum
थोड़ा खाने पर भी पेट फूलना और भारीपन।

शाम 4 से 8 बजे के बीच लक्षण बढ़ते हैं।

मीठा व गर्म पेय पसंद, ठंडी चीज़ें कम।

6. Nux Vomica
शराब, मसालेदार भोजन या दवाइयों से लिवर खराब।

अपूर्ण मल त्याग, पेट में दर्द और भारीपन।

खट्टे-तीखे डकार।

7. Phosphorus
फैटी डिजनरेशन, सिरॉसिस और पीलिया की प्रवृत्ति।

ठंडी चीज़ें (आइसक्रीम, जूस) की तीव्र इच्छा।

दुर्गंधयुक्त मल व गैस।

अन्य उपयोगी दवाएँ
Mercurius – पीलिया, दाँतों के निशान वाली जीभ, बदबूदार सांस।

Dolichos – लिवर की सूजन और असहनीय खुजली।

Myrica Cerifera – पीलिया और हृदय संबंधी शिकायतें।

Podophyllum Peltatum – दस्त और लिवर में दर्द।

Sulphur – सहायक (Intercurrent) औषधि।

Boldo, Picric Acid – लिवर कंजेशन और वसायुक्त ग्रंथियाँ।

निष्कर्ष
फैटी लिवर रोग धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जो समय पर ध्यान न देने पर सिरॉसिस तक पहुँच सकती है। होम्योपैथी में इसका उपचार संभव है, बशर्ते सही औषधि का चुनाव मरीज की संपूर्ण स्थिति को देखकर किया जाए।

सुझाव: रोगी को स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, शराब और वसायुक्त भोजन से परहेज़ करना चाहिए। साथ ही, होम्योपैथिक विशेषज्ञ की सलाह से दवाएँ लेना सबसे बेहतर परिणाम देता है।डॉ0 आर.एन.हॉस्पिटल  रोडवेज बस स्टैंड के सामने सहसवान जनपद बदायूं (समर इंडिया) 

 

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