अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

Divorce-सुप्रीम कोर्ट का तलाक के मामलों पर बेहद अहम फैसला, आपसी सहमति और लेन-देन के बाद पीछे नहीं हट सकते पति-पत्नी’

On: April 15, 2026 4:02 PM
Follow Us:
Supreme Court News
---Advertisement---

नई दिल्ली/लीगल डेस्क: तलाक (Divorce) और पति-पत्नी के आपसी विवादों को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पति-पत्नी ने मध्यस्थता (Mediation) के जरिए आपसी सहमति से तलाक लिया है और लेन-देन (सेटलमेंट) की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली है, तो इसके बाद दोनों में से कोई भी पक्ष अपनी सहमति से पीछे नहीं हट सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंडल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने एक याचिका का निपटारा करते हुए समझौते से मुकरने पर कड़ी नाराजगी जताई और याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई।

क्या है पूरा मामला? 23 साल बाद दायर किया था तलाक

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा यह मामला काफी दिलचस्प है। कपल की शादी साल 2000 में हुई थी। शादी के 23 साल बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की। अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते के लिए ‘मध्यस्थता केंद्र’ (Mediation Centre) भेजा।

  • काउंसिलिंग के दौरान दोनों पति-पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक लेने और सभी विवादों का निपटारा करने का फैसला किया।

  • सेटलमेंट: समझौते के अनुसार, पति ने पत्नी को 2 किश्तों में 1.5 करोड़ रुपये, 14 लाख रुपये कार खरीदने के लिए और कुछ गहने दिए। वहीं, पत्नी ने भी जॉइंट अकाउंट से 2.5 करोड़ रुपये पति को ट्रांसफर करने पर सहमति जताई।

पत्नी का यू-टर्न और बेतुकी दलील

दोनों ने आपसी सहमति से तलाक तो ले लिया और समझौते के अनुसार लेन-देन भी कर लिया, लेकिन बाद में पत्नी ने अपनी सहमति वापस ले ली। हैरान करने वाली बात यह रही कि पत्नी ने पति के खिलाफ ‘घरेलू हिंसा अधिनियम’ (Domestic Violence Act) के तहत शिकायत भी दर्ज करा दी, जिस पर मजिस्ट्रेट ने समन जारी कर दिया।

जब कोर्ट ने समझौते से पीछे हटने का कारण पूछा, तो पत्नी ने दलील दी कि पति ने उसे 120 करोड़ रुपये के गहने और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्कुट देने का वादा किया था, जिसे टैक्स से बचने के लिए समझौते में शामिल नहीं किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘यह न्याय प्रणाली का अनादर है’

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पत्नी की इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे न्याय प्रणाली का सीधा अनादर बताया। कोर्ट ने अपने जजमेंट में कुछ अहम नियम स्पष्ट किए:

  1. सहमति वापसी की शर्त: आपसी सहमति से तलाक के मामलों में अंतिम डिक्री (Final Decree) जारी होने से पहले तो दोनों पक्ष अपनी सहमति वापस ले सकते हैं, लेकिन कागजी कार्रवाई और सेटलमेंट पूरा होने के बाद पीछे हटने का अधिकार नहीं है।

  2. मध्यस्थता का सम्मान: मध्यस्थता के जरिए हुए फैसले भी कानून के दायरे में आते हैं। इस कानूनी प्रक्रिया से पीछे हटना न्यायिक व्यवस्था की बुनियाद को कमजोर करता है और इससे लोगों का भरोसा उठता है।

  3. लगेगा भारी जुर्माना: बेंच ने सख्त हिदायत दी कि अगर दोनों पक्षों में से कोई भी बिना किसी उचित और ठोस कारण के समझौते से पीछे हटता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर रोक लग सके।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply