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आज CM पद की शपथ लेंगे सम्राट चौधरी, जानें BJP ने उन्हें ही क्यों सौंपी सत्ता की चाबी?

On: April 15, 2026 8:47 AM
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पटना: बिहार की सियासत में आज एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी आज बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। राजधानी पटना के लोकभवन में आयोजित होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश के राज्यपाल सैयद अता हसनैन उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

उनके साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी को भी उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ दिलाई जाएगी। वहीं, एनडीए (NDA) के अन्य सहयोगी दलों जैसे चिराग पासवान की LJP-R, जीतनराम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की RLM के नेताओं को मई में होने वाले कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद दिया जाएगा।

आखिर BJP ने सम्राट चौधरी को ही क्यों चुना?

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि BJP ने सम्राट चौधरी को यूं ही मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं सौंपी है। इसके पीछे पार्टी की एक बेहद सोची-समझी और दूरगामी रणनीति काम कर रही है। आइए जानते हैं वे 5 बड़े कारण, जिन्होंने सम्राट चौधरी को इस कुर्सी तक पहुंचाया:

  • 30 साल का व्यापक अनुभव: सम्राट चौधरी 1990 के दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। अपने 30 वर्षों के करियर में उन्होंने राजद (RJD), जेडीयू (JDU) और बीजेपी (BJP) तीनों प्रमुख दलों के साथ काम किया है, जिससे उन्हें बिहार की राजनीति की गहरी समझ है। 1999 में वे राबड़ी देवी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

  • मजबूत ‘कुशवाहा’ वोटबैंक और सामाजिक पकड़: सम्राट चौधरी बिहार के प्रभावशाली कुशवाहा समुदाय से आते हैं। नीतीश कुमार के कुर्मी समुदाय, अन्य पिछड़ा (OBC) और अति पिछड़ा वर्ग को मिला लिया जाए, तो यह समीकरण करीब 60% वोट बैंक का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हें सीएम बनाकर बीजेपी ने इस बड़े वोटबैंक को सीधे तौर पर साध लिया है।

  • सहयोगी दलों पर निर्भरता खत्म करने की रणनीति: बीजेपी अब बिहार में अपने दम पर खड़ी होना चाहती है। वह जेडीयू या अन्य क्षेत्रीय दलों के चेहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। सम्राट चौधरी को सत्ता देकर बीजेपी अपना खुद का एक मजबूत ओबीसी चेहरा स्थापित कर रही है।

  • प्रशासनिक दक्षता: साल 2024 से बतौर उपमुख्यमंत्री उन्होंने प्रदेश के वित्त, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे अहम विभाग संभाले हैं। इससे उन्हें सरकार चलाने और प्रशासनिक कामकाज की बेहतरीन समझ हो चुकी है।

  • रणनीति के माहिर खिलाड़ी: वे समय और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने में माहिर हैं। 2014 में RJD विधायकों के एक गुट को तोड़कर JDU में शामिल कराना हो, या कभी नीतीश कुमार के धुर विरोधी रहने के बावजूद 2024 से 2026 के बीच उनके साथ मिलकर सरकार चलाना हो, सम्राट ने हर बार अपनी निर्णय क्षमता को साबित किया है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी प्रदेश के वरिष्ठ नेता रहे हैं, जिसका फायदा उन्हें मिला है।

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