Amroha News-अमरोहा | 25 फरवरी 2026 जनपद में न्यायिक दायित्वों के प्रभावी क्रियान्वयन और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को जिले के शीर्ष न्यायिक अधिकारियों ने विभिन्न संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विवेक, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट प्रथम) हेमलता त्यागी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अभिषेक कुमार व्यास ने बाल संप्रेक्षण गृह (Observation Home) और नारी निकेतन (मुरादाबाद) पहुंचकर वहां की जमीनी हकीकत परखी।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और बंदियों को दी जा रही सुविधाओं का आकलन करना और व्यवस्था में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना था।
बाल संप्रेक्षण गृह: बच्चों से किया संवाद, शिक्षा-स्वास्थ्य पर जोर
निरीक्षण की शुरुआत बाल संप्रेक्षण गृह (Observation Home) से हुई।
आत्मीय संवाद: माननीय जिला न्यायाधीश महोदय ने वहां रह रहे बच्चों से बेहद आत्मीयता से बातचीत की और उनकी शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और दैनिक गतिविधियों की जानकारी ली।
सख्त निर्देश: उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक बच्चे के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ‘व्यक्तिगत मेडिकल कार्ड’ अनिवार्य रूप से बनाए जाएं।
शिक्षा और कौशल विकास: जिन बच्चों का अब तक स्कूलों में दाखिला नहीं हुआ है, उनका शीघ्र नामांकन कराया जाए। इसके अलावा, बच्चों के लिए नियमित रूप से कौशल विकास, परामर्श सत्र और नैतिक शिक्षा की कक्षाएं संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया।
नारी निकेतन: सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा
इसके बाद निरीक्षण समिति मुरादाबाद स्थित नारी निकेतन भी पहुंची। यहां अधिकारियों ने संरक्षण प्राप्त महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, उनके परामर्श और पुनर्वास (Rehabilitation) से जुड़ी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को चिह्नित करते हुए संबंधित अधिकारियों को उन्हें तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश दिए गए।
न्यायिक अधिकारियों के प्रमुख बयान:
जिला न्यायाधीश श्री विवेक: “संस्थाओं में निवासरत प्रत्येक किशोर और महिला बंदी को मानवीय गरिमा के अनुरूप समुचित सुविधाएं मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है। प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के मानक पूरे हों। इस दिशा में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
एडीजे (पॉक्सो) हेमलता त्यागी: “संस्थाओं में रह रहे किशोरों और महिला बंदियों को उनके अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है कि पीड़ितों को मानवीय गरिमा के साथ रखा जाए।”
सचिव अभिषेक कुमार व्यास: “जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य केवल मुफ्त कानूनी सहायता देना नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग को न्याय व्यवस्था से जोड़ना है। ऐसे औचक निरीक्षणों से व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) बढ़ती है।”
शीर्ष न्यायिक अधिकारियों द्वारा उठाया गया यह कदम न्यायिक सक्रियता और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि जिले की संस्थागत व्यवस्थाओं में तेजी से सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

