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Surya Grahan 2025 Date : 21 या 22 सितंबर को सूर्य ग्रहण? जानें सूतक काल और इसका ज्योतिषीय असर

On: September 11, 2025 11:34 AM
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Surya Grahan 2025
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Surya Grahan 2025: चंद्र ग्रहण के तुरंत बाद अब पितृपक्ष के आखिरी दिन साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, आइए जानते हैं यह ग्रहण किस तारीख को लगेगा, भारत में इसे देखा जा सकेगा या नहीं और साथ ही सूतक काल से जुड़ी अहम जानकारी.

 

SurYa Grahan 2025 Kab hai: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण सितंबर में लगने जा रहा है. यह ग्रहण आश्विन मास की अमावस्या तिथि पर पड़ेगा. सूर्य ग्रहण को वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है, यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात में शुरू होगा, जिससे इसका असर भारत पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा.

 

पंचांग के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण अश्विन माह की अमावस्या तिथि को पड़ रहा है. यह 21 सितंबर की रात में लगभग 11 बजे शुरू होगा और देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. यानी कुल मिलाकर यह लगभग 4 घंटे से ज्यादा समय तक चलेगा. लेकिन रात का समय होने के कारण यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.
कहां-कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?

 

Chandra Grahan 2025 : जानिए ग्रहण का समय, सूतक काल की शुरुआत और इसका प्रभाव

Surya Grahan 2025 Date : कहां-कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?

यह आंशिक सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में दिखाई देगा, जहां उस समय दिन का समय होगा. इन क्षेत्रों में शामिल हैं. दक्षिणी प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर,दक्षिण महासागर, पोलिनेशिया, मेलानेशिया, नॉरफ़ॉक द्वीप, क्राइस्टचर्च और वेलिंग्टन में ये सूर्य ग्रहण नजर आने वाला है.

 

Surya Grahan 2025 Date : सूतक काल मान्य क्यों नहीं होगा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार जब ग्रहण भारत में दिखाई देता है, तभी उसका सूतक काल प्रभावी माना जाता है. चूंकि 21 सितंबर का सूर्य ग्रहण रात में होगा और भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस बार सूतक काल का पालन नहीं किया जाएगा.

Surya Grahan 2025 Date : सूर्य ग्रहण का राशियों पर प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय सूर्य कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे, जिससे सभी 12 राशियों के जातकों पर इसका कुछ न कुछ प्रभाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, भारत में सूतक काल न होने के कारण इसका नकारात्मक प्रभाव कम होने की संभावना है, फिर भी कुछ राशियों के लिए यह अवधि थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है.इस दौरान विशेष रूप से कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के जातकों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

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