Supreme Court News : राजस्थान के फलोदी में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर देश की हाईवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 15 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे के बाद अब मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. शीर्ष अदालत ने न सिर्फ इस दुर्घटना का संज्ञान लिया है, बल्कि यह भी संकेत दिए हैं कि देशभर में सड़क हादसों को रोकने के लिए एक समान गाइडलाइंस बनाई जा सकती हैं.
इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे बने अवैध ढाबों और छोटे भोजनालयों को लेकर. कोर्ट की सख्ती के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब हाईवे किनारे चलने वाले ढाबों पर ताला लग सकता है, या फिर उनके संचालन के लिए नए सख्त नियम लागू होंगे.
सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा राजस्थान के फलोदी हादसे के संदर्भ में उठा, जहां एक टेंपो ट्रैवलर खड़े ट्रेलर से टकरा गया. इस दुर्घटना में 10 महिलाएं और 4 बच्चे समेत कुल 15 लोगों की मौत हो गई थी. हादसा भारतमाला हाईवे पर हुआ. जहां सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण और अनियंत्रित रुकावटें पहले से सवालों के घेरे में थीं. कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए इसे केवल एक राज्य तक सीमित न मानकर पूरे देश की समस्या करार दिया.
NHAI बनाम प्रशासन: जिम्मेदारी किसकी?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NHAI के पास अवैध ढाबों को हटाने का अधिकार तो है. लेकिन व्यवहारिक रूप से यह जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासन को सौंप दी गई है. उनका तर्क था कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन जिला मजिस्ट्रेट के अधीन होते हैं. NHAI का उन पर सीधा नियंत्रण नहीं होता. इसी वजह से कार्रवाई में ढील देखने को मिलती है. यहीं से कोर्ट ने सीधा सवाल दागा आखिर कानून के तहत अंतिम जिम्मेदारी किसकी है?
सुप्रीम कोर्ट क्या करना चाहता है?
जस्टिस महेश्वरी ने साफ किया कि अदालत का उद्देश्य किसी एक एजेंसी को दोषी ठहराना नहीं है. कोर्ट का उद्देश्य कानूनी खामियों को भरते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करना है, ताकि भविष्य में फलोदी जैसे हादसे न दोहराए जाएं.

