अंतरराष्ट्रीयराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशउत्तराखंडपंजाबहरियाणाझारखण्डऑटोमोबाइलगैजेट्सखेलनौकरी और करियरमनोरंजनराशिफलव्यवसायअपराध

---Advertisement---

कांवड़ यात्रा में भोजनालय मालिक लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करें: Supreme Court

On: July 23, 2025 2:34 PM
Follow Us:
Supreme Court
---Advertisement---

नई दिल्ली: Supreme Court ने कांवड़ यात्रा मार्ग के भोजनालयों पर ‘क्यूआर कोड’ प्रदर्शित करने संबंधी विवाद पर मंगलवार को राज्य सरकारों को कोई निर्देश नहीं दिया, लेकिन दुकानदारों से कहा कि वे लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करें।

Supreme Court ने कहा: आदिवासी महिलाओं को पैतृक संपत्ति पर समान अधिकार – रीति-रिवाज समानता पर हावी नहीं हो सकते

Supreme Court न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने कहा कि ग्राहकों को यह जानने का अधिकार है कि क्या संबंधित भोजनालय में पहले मांसाहारी भोजन परोसा जाता था। अगर कोई केवल कांवड़ यात्रा के दौरान शाकाहारी भोजन परोसता है तो इसके बारे में ग्राहकों को जानकारी होनी चाहिए।

पीठ ने कहा, “हमें सूचित किया गया है कि आज यात्रा का अंतिम दिन है। इस समय हम सभी संबंधित होटल मालिकों से अनुरोध करते हैं कि वे वैधानिक रूप से आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करने के आदेश का पालन करें। हम अन्य विवादित मुद्दों पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।”

पीठ ने कांवड़ यात्रा मार्ग के भोजनालयों पर ‘क्यूआर कोड’ प्रदर्शित करने संबंधी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह कहते हुए कोई भी आदेश जारी करने से इनकार कर दिया कि मंगलवार (22 जुलाई) यात्रा का आखिरी दिन है।

Supreme Court हमें सूचित किया गया है कि आज यात्रा का अंतिम दिन है

प्रो. अपूर्वानंद झा की ओर से दायर इस याचिका में दलील दी गयी थी कि ये निर्देश शीर्ष अदालत के 2024 के एक आदेश के खिलाफ है। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर विक्रेताओं को अपनी पहचान उजागर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे निर्देश संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17, 19 और 21 का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों को सभी क्यूआर कोड-आधारित पहचान संबंधी अनिवार्यताओं या किसी भी अन्य ऐसी व्यवस्था को तुरंत वापस लेने का निर्देश देने की अपील की, जिससे विक्रेताओं के मालिक होने की पहचान या धार्मिक पहचान का खुलासा होता हो।

याचिका में राज्यों को हलफनामा दायर करके यह बताने का निर्देश देने की भी अपील की गई थी कि वर्तमान अनिवार्यताएं संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कैसे नहीं करती हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!