नयी दिल्ली: Supreme Court ने अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रो. अली खान महमूदाबाद को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया टिप्पणी मामले में हरियाणा में दर्ज दो मुकदमों के तथ्यों पर केंद्रित जांच करने का बुधवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) को निर्देश दिया।
Supreme Court कॉलेजियम ने की तीन जजों की नियुक्ति की सिफारिश
Supreme Court ने प्रो. महमूदाबाद को 21 मई को दी गई अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाते हुए कहा कि वह इस मामले में जुलाई में सुनवाई करेगी।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अंशकालिक कार्य दिवस पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के कपिल सिब्बल की इस आशंका पर कि जांच का दायरा बढ़ाया सकता है, कहा, “हम निर्देश देते हैं कि एसआईटी की जांच दो मुकदमों के तथ्यों तक ही सीमित रहेगी।”
अदालत ने हरियाणा पुलिस से प्रोफेसर महमूदाबाद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के नोटिस पर अपनी प्रतिक्रिया के बारे में भी बताने को कहा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 मई को कहा कि उसने गिरफ्तार अहमूदाबाद के संबंध में एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है।
पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सिब्बल ने आशंका जताई थी कि जांच का इस्तेमाल मुकदमों इतर अन्य चीजों को देखने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि पुलिस उनसे (महमूदाबाद) डिवाइस मांग रही है। पीठ ने इस पर हरियाणा सरकार के वकील से पूछा, “दोनों मुकदमें रिकॉर्ड में दर्ज हैं। ऐसे में डिवाइस की क्या जरूरत है? दायरा बढ़ाने की कोशिश न करें।”
Supreme Court ने प्रो. महमूदाबाद को 21 मई को दी गई
श्री सिब्बल ने पीठ के समक्ष गुहार लगाते हुए यह भी कहा कि महमूदाबाद पर लगाई गई अंतरिम जमानत शर्तों में ढील दी जानी चाहिए। अदालत ने 21 मई को अंतरिम जमानत देते हुए पासपोर्ट जमा करने समय कई पाबंदियां लगाई थीं। उनमें पासपोर्ट जब्त करने के अलावा भारत-पाकिस्तान युद्ध पर बोलने की अनुमति नहीं देना भी शामिल है।

