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श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय : चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर 142 यूनिट रक्तदान; काव्यांजलि सुन नम हुईं आंखें

On: February 28, 2026 9:24 AM
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अमरोहा | एजुकेशन और इवेंट डेस्क राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान में देश के महान सपूत और आजादी के रणबांकुरे चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर ‘आजादी का महानायक “आजाद”‘ विषय पर एक शानदार काव्य गोष्ठी और वृहद रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। देशभक्ति के जज्बे से लबरेज इस रक्तदान शिविर में युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 142 यूनिट रक्त का संचय किया गया।

दीप प्रज्वलन और फीता काटकर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विश्वविद्यालय के डॉ. सी.वी. रमन सभागार में हुआ।

  • संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी, प्रभारी कुलपति युवराज सिंह और कुलसचिव पीयूष कुमार पाण्डेय ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर और रक्तदान शिविर का फीता काटकर कार्यक्रम की शुरुआत की।

“युवाओं में जलाई क्रांति की मशाल”

अपने संबोधन में संस्थापक अध्यक्ष   सुधीर गिरि ने चंद्रशेखर आजाद के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कहा कि, “यह देश आजादी के रणबांकुरे आजाद का सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने देश के युवाओं के भीतर क्रांति की जो मशाल जलाई, उसी ने सही मायने में भारत की आजादी की मजबूत नींव रखी थी।”

कविताओं ने जगाया देशभक्ति का जज्बा, आंखें हुईं नम

काव्य गोष्ठी के दौरान चंद्रशेखर आजाद के जीवन और उनके संघर्षों पर शानदार काव्यांजलि प्रस्तुत की गई:

  • डॉ. मधु चतुर्वेदी (विख्यात साहित्यकार): उन्होंने आजाद द्वारा अपने घरवालों को लिखी गई अंतिम चिट्ठी पर आधारित मर्मस्पर्शी कविता का पाठ किया:

“जा रहा हूँ सोचकर लौट आऊँगा मैं, पर सफर तो सफर है राह मत देखना। > आ सका तो रहूँगा तुम्हारा सदा, पर मिलन के सपन आह मत देखना।” इन पंक्तियों ने सभागार में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।

  • डॉ. राजीव त्यागी (प्रतिकुलाधिपति): उन्होंने डॉ. रघुवंशी की ओजस्वी पंक्तियों के माध्यम से आजाद को याद किया:

“ना चाहा वंशजों ने, जिसके कुछ भी बाद दुनिया से। मिटा सकता नहीं कोई भी, उसकी याद दुनिया से।। बिना जिसके अमर बलिदान की गाथा अधूरी है। जिया ‘आजाद’ दुनिया में, गया ‘आजाद’ दुनिया से।।” उन्होंने आजाद की वीरता का स्मरण कराते हुए कहा कि अंग्रेजों से लोहा लेते हुए जब वह घिर गए, तो उन्होंने दुश्मनों की पकड़ में आने के बजाय खुद को गोली मारकर भारत माता के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।

कार्यक्रम को प्रभारी कुलपति युवराज सिंह और कुलसचिव डॉ. पीयूष कुमार पाण्डेय ने भी संबोधित किया और युवाओं को आजाद के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।

इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

इस देशभक्तिपूर्ण और गरिमामयी आयोजन में विश्वविद्यालय के सलाहकार श्री आर.एस. शर्मा, सीएफओ विकास भाटिया, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. नीतू पंवार, डॉ. सुमन कुमारी, डॉ. आशुतोष, डॉ. एस.के. श्रीवास्तव, डॉ. योगेश्वर शर्मा, डॉ. ओम प्रकाश गोसाई, डॉ. धीरज, डॉ. राजवर्द्धन, डॉ. अरुण कुमार गोस्वामी, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. श्रीराम गुप्ता, फैजान, शक्तिध्वज, मेरठ परिसर से निदेशक डॉ. पंकज चौधरी और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्टाफ मौजूद रहा।

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