बिना पंजीकरण के चल रहे जच्चा बच्चा केंद्र तथा मृतक प्रसूता के परिजनों में हुआ समझौता,
प्रसूता ने जब जच्चा बच्चा केंद्र में ही तोड़ दिया था दम तो क्यों परिजन उसे पुलिस कार्रवाई के लिए लेकर पहुंचे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,
चिकित्सा अधीक्षक से पुलिस कार्यवाही की क्यों की मांग, चिकित्सा अधीक्षक ने मृतका के शब का पीएम करने के लिए क्यों पुलिस को भेजा मेमो,
आखिर परिजन क्यों नहीं कराना चाहते मृतका का पीएम ,
(सहसवान से समर इंडिया के लिए एसपी सैनी की रिपोर्ट)

सहसवान (बदायूं) नगर के मोहल्ला शाहबाजपुर के भट्टी टोला निवासी अजीम दूसरी बार गर्भवती हुई पत्नी आसमा के प्रसव के लिए नगर के मोहल्ला सैफुल्लागंज में बिना पंजीकरण के चल रहे राजकुमारी जच्चा बच्चा केंद्र पर सुबह 9:00 बजे के लगभग पहुंचे जहां जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी ने साधारण प्रसव के लिए आसमा को भर्ती कर लिया आसमा को भर्ती करने के दर्द से तड़प रही गर्भवती आसमा के प्रसव करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी दर्द से तड़पती आसमा हाथ पैर छटकती रही परंतु बेरहम जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी ने जबरन प्रशब करा दिया आसमा ने एक स्वस्थ बेटे को तो जन्म दे दिया परंतु असहानिया पीड़ा वह सह ना सकी और उसने पल भर में ही जच्चा बच्चा केंद्र में ही दम तोड़ दिया जच्चा बच्चा केंद्र में ही दम तोड़ते ही जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी निकल भागी तो परिजन पुलिस कार्यवाही के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहसवान पहुंचे जहां उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी पर लापरवाही से प्रसव करना तथा आसमा की राजकुमारी को जिम्मेदार बताते हुए कार्यवाही की जाने की मांग की जिस पर चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर प्रशांत त्यागी ने तत्काल एक मेमो बनाकर थाना पुलिस को भेज दिया पुलिस को जैसे ही मेमो मिला भारी पुलिस प्रभारी निरीक्षक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे पुलिस कर्मियों ने मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पीएम कराए जाने के लिए कार्यवाही प्रारंभ कर दी।
पुलिस ने जैसे ही कार्यवाही प्रारंभ की की कुछ दलाल टाइप प्रवृत्ति के लोग भी मौके पर पहुंच गए और परिजनों पर जबरन दबाव डालकर चर्चा है की जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी तथा मृतका के परिजनों के मध्य कोई आर्थिक समझौता करते हुए जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी के विरुद्ध कार्यवाही कराए जाने से परिजनों ने इनकार कर दिया तथा कहा कि वह कोई कार्यवाही नहीं करना चाहते इसलिए वह मृतक आसमा का पीएम भी नहीं कराएंगे,
मृतक आसमा के परिजनों से लिखित रूप में मिले पत्र में कार्यवाही न किए जाने का किया गया अनुरोध के बाद पुलिस मृतक आसमा के शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही छोड़कर चली गई। तत्पश्चात परिजन मृतका के शब को अपने घर ले कर लौट गए।
अब सवाल पैदा होता है कि मृतक आसमा के परिजन जब जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी पर लापरवाही से प्रसव करने का आरोप लगाते हुए जच्चा बच्चा केंद्र पर जब हंगामा कर रहे थे हंगामा करने के बाद उपरोक्त परिजन पुलिस कार्यवाही कराई जाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां चिकित्सा अधीक्षक से क्यों अनुरोध किया कि वह जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी के विरुद्ध कार्यवाही कराय जाने के लिए मृतका का पीएम करना चाहते हैं जिस पर चिकित्सा अधीक्षक ने तत्काल मेमो बनाकर पुलिस को मामले की जानकारी दे दी जिस पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और मृतक आसमा के शव को अपने कब्जे में लेकर पीएम कार्यवाही करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी।
अब सवाल पैदा होता है कि जब उपरोक्त मृतक आसमा के परिजनों को जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी के विरुद्ध कार्यवाही करानी नहीं थी तो क्यों अस्पताल लेकर पहुंचे चिकित्सा अधीक्षक से कार्यवाही कराई जाने के लिए क्यों अनुरोध किया आखिर इसके पीछे उनकी क्या मनसा थी यह प्रश्न नगर वासियों के जहां में बिजली की तरह कौंध रहे हैं।
क्या बिना पंजीकरण के चल रहे जच्चा बच्चा केंद्र की संचालिका राजकुमारी तथा परिजनों के मध्य क्या उनके घर पर कोई सौदेबाजी नहीं हो पाई थी या अगर सौदेबाजी हुई भी तो लेनदेन नहीं हो पाया या फिर परिजन तथा केंद्र संचालित का राजकुमारी थोड़े बहुत पैसे देकर मामले को निपटाना चाहती थी या फिर परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा पुलिस का प्रभाव जमा कर मोटा पैसा लेने के लिए नौटंकी कर रहे थे ऐसे ही अनेक प्रश्न नगर की जनता में चर्चा का विषय बने हुए हैं चर्चा यह भी हो रही है कि अगर मृतक आसमा के परिजनो को उसकी मौत का जच्चा बच्चा केंद्र संचालिका राजकुमारी से सौदा ही करना था तो इतना नाटक क्यों किया बरहाल नगर में तीन दर्जन से ज्यादा बिना पंजीकरण के चल रहे जच्चा बच्चा केंद्र पर आए दिन प्रसुताओं की हो रही मौत तथा जच्चा बच्चा केंद्र संचालक तथा परिजनों के मध्य हुई आर्थिक सौदेबाजी के चलते कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही जिसके कारण नगर एवं क्षेत्र में बिना पंजीकरण के चल रहे जच्चा बच्चा केंद्र पर प्रसुताओं की हो रही मौतो से स्वास्थ्य विभाग की बंद आंखें यह सवाल पैदा करती हैं कि कहीं ना कहीं स्वास्थ्य विभाग तथा बिना पंजीकरण के चल रहे जच्चा बच्चा केंद्र संचालकों के मध्य कोई ना कोई बड़ा खेल खेला जा रहा है।
बरहाल एक बार फिर नगर एवं देहात क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में बिना पंजीकरण के चल रहे जच्चा बच्चा केंद्रों की पोल खोल दी है।
