पुरी: Odisha के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान रविवार तड़के सारधाबली में गुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ मचने का यह पहला मामला है जब इस तरह की घटना में किसी श्रद्धालु की जान गयी है। गौरतलब है कि Odisha हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गयी और सात अन्य घायल हो गए।
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इससे पहले 2008, 2012 और 2015 के दौरान Odisha पुरी रथ यात्रा में भगदड़ में भक्तों की मौत हो चुकी है, लेकिन गुंडिचा मंदिर के पास श्री जगन्नाथ मंदिर की नौ दिवसीय यात्रा में ऐसी भगदड़ कभी नहीं हुयी थी। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस त्रासदी के लिए भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को जिम्मेदार ठहराया है।
Odisha पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई.बी खुरानिया ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद इस घटना का कारण भक्तों द्वारा अपने मोबाइल फोन से सेल्फी और फोटो लेने को बताया।
Odisha के लोग तीन श्रद्वालुओं की मौत से सदमे में हैं। घायल सात लोगों का इलाज जिला मुख्यालय अस्पताल में चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुंडिचा मंदिर के पास बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा थे। हर घंटे सैकड़ों लोग भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को देखने पुरी पहुंच रहे थे।
रात करीब 12:40 बजे पारंपरिक ‘पहुंदी’ अनुष्ठान के साथ दर्शन बंद होने तक स्थिति शांतिपूर्ण रही। मूर्तियों को पर्दे से ढक दिया गया। गुंडिचा मंदिर में दर्शन के लिए इंतजार कर रहे कई भक्तों को मंदिर बंद होने के बारे में पता नहीं था और वे रथों के पास इंतजार करते रहे। सुबह करीब चार बजे पर्दे हटाए गए और पुजारियों ने मंगल आरती से देवताओं की दैनिक रस्में शुरू कीं।
आरती की घंटियों की आवाज सुनकर समारोह देखने के लिए भारी भीड़ रथों की ओर दौड़ पड़ी। उसी समय दो ट्रकों ने भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में आकर पहांडी अनुष्ठान के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीढ़ी के हिस्सों को उतार दिया, जो देवताओं को मंदिर में ले जाने में मदद करती हैं। सीमित स्थान होने के कारण ट्रकों ने रथों के पास सीढ़ियाँ उतार दीं और भीड़ बढ़ने पर कम से कम 15 भक्त सीढ़ियों के ढेर से टकरा गए और कुचले गए।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर वरिष्ठ या जिम्मेदार अधिकारी नहीं थे। केवल कुछ कांस्टेबल मौजूद थे और पास के प्राथमिक चिकित्सा पोस्ट पर कोई एम्बुलेंस या मेडिकल टीम उपलब्ध नहीं थी। मृतकों में से एक के पति ने मीडिया को बताया कि वह एक घंटे से अधिक समय तक मदद के लिए रोता रहा, तब जाकर एम्बुलेंस आयी।
जब तक वे अस्पताल पहुँचे, तब तक दो व्यक्ति पहले ही मर चुके थे और तीसरे की कुछ ही देर बाद मृत्यु हो गयी। घटनाओं की प्रारंभिक समीक्षा से गंभीर प्रशासनिक चूक का पता चलता है। मंदिर के अनुष्ठान रिकॉर्ड के अनुसार, 27 जून की रात को पाहुदा अनुष्ठान नहीं किया गया था।
वहीं, 28 जून को पुजारियों ने अप्रत्याशित रूप से दर्शन बंद कर दिए, जिससे भक्तों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने का अवसर नहीं मिल पाया। इससे भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे पुजारियों और मंदिर प्रशासन के बीच समन्वय की स्पष्ट कमी सामने आयी। पाहुदा अनुष्ठान के बिना दर्शन जारी रखने से भीड़ को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती थी। स्थापित मानदंडों के अनुसार, पाहुदा केवल मुख्य प्रशासक की स्वीकृति से ही किया जा सकता है।
Odisha प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर वरिष्ठ या जिम्मेदार अधिकारी नहीं थे
एक विवादास्पद कदम के तहत प्रशासन ने गुंडिचा मंदिर के सौंदर्यीकरण की आड़ में पूरे सारधाबली क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी। पहले इस क्षेत्र को परंपरागत रूप से संतों, साधुओं और तीर्थयात्रियों द्वारा विश्राम के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे कई लोगों को रात भर मंदिर के सामने शरण लेनी पड़ी, जिससे भीड़ और बढ़ गयी।

