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Jhajjar News : ‘लक्ष्य बड़ा हो तो हार मत मानो’, झज्जर की प्रख्या ने 5वें प्रयास में क्रैक किया UPSC

On: March 7, 2026 9:34 PM
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Jhajjar News : ‘झज्जर | एजुकेशन एवं इंस्पिरेशन डेस्क संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में हरियाणा की बेटियों का डंका लगातार बज रहा है। इसी कड़ी में झज्जर जिले के बादली क्षेत्र की होनहार बेटी प्रख्या ने अपनी अटूट लगन, कड़ी मेहनत और धैर्य के दम पर देशभर में 265वां रैंक हासिल कर अपने परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

प्रख्या ने यह शानदार सफलता अपने 5वें प्रयास में प्राप्त की है और एक प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IPS) बनने के अपने बचपन के सपने को आखिरकार साकार कर दिखाया है। शुक्रवार को जैसे ही यूपीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, उनके घर और पूरे बादली क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाई देने वालों का तांता लग गया।

संतुष्टि नहीं मिली तो ठुकरा दी थी पिछली रैंक

प्रख्या की सफलता की कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो एक-दो असफलता के बाद हार मान लेते हैं।

  • अप्रैल 2024 में भी मिली थी सफलता: प्रख्या ने बताया कि इससे पहले अप्रैल 2024 में घोषित यूपीएससी के परिणाम में उन्हें 584वां रैंक मिला था।

  • लक्ष्य के लिए बढ़ाया संघर्ष: वह उस रैंक से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं, इसलिए उन्होंने प्रशासनिक सेवा ज्वाइन करने के बजाय बेहतर रैंक पाने के लिए दोबारा तैयारी शुरू कर दी।

  • 14 घंटे की पढ़ाई: पिछली बार जहां वह दिन में करीब 10 घंटे पढ़ाई करती थीं, वहीं इस बार उन्होंने अपना समय बढ़ाकर 12 से 14 घंटे तक कर दिया। इसी दृढ़ संकल्प का नतीजा है कि इस बार उन्होंने 265वीं रैंक पर कब्जा जमाया।

परिवार और पति का मिला भरपूर सपोर्ट

प्रख्या की इस उपलब्धि पर उनके पिता रामवीर, माता सुशीला और दादा जिले सिंह बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।

  • परिवार का कहना है कि बेटी ने पूरे गांव का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है। जब वह गांव वापस लौटेंगी, तो उनका बेहद जोरदार और भव्य स्वागत किया जाएगा।

  • इस कठिन सफर में प्रख्या को उनके पति का भी पूरा सहयोग मिला, जो वर्तमान में दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं।

समाज को संदेश: “बेटियों को खुला आसमान दें”

अपनी सफलता का श्रेय अपनी मेहनत और परिवार को देते हुए प्रख्या ने समाज के लिए एक बेहद खास संदेश दिया।

“मेहनत और धैर्य ही किसी भी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। मेरी सभी अभिभावकों से अपील है कि वे अपनी बेटियों को भी खुला आसमान और पूरे अवसर दें, ताकि वे अपनी प्रतिभा के दम पर परिवार और देश का नाम रोशन कर सकें।”

प्रख्या का कहना है कि उनका सपना शुरू से ही प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना था। उनकी इच्छा है कि उन्हें ‘होम कैडर’ (Home Cadre) मिले, लेकिन जो भी कैडर आवंटित होगा, वह उसमें पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करेंगी।

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