नई दिल्ली। India की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवाद के खिलाफ उठाया गया एक ऐतिहासिक और बहुआयामी कदम है, जिसमें सैन्य और गैर-सैन्य दोनों रणनीतियों का संयोजन देखने को मिला है।
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इस ऑपरेशन में न सिर्फ आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट किया गया, बल्कि पाकिस्तान की आक्रामकता को भी प्रभावी रूप से रोकने में सफलता मिली और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश दिया कि India अब आतंक के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।
भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकवादी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इनमें बहावलपुर, मुरिदके, मुजफ्फराबाद और कोटली जैसे ठिकाने शामिल थे, जो जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के मुख्यालय रहे हैं। ये वही आतंकी संगठन हैं जिन्होंने पुलवामा (2019) और मुंबई हमले (2008) जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था।
गत 7 से 9 मई के दौरान पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में India ने लाहौर समेत पाकिस्तान के कई एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया। साथ ही, भारत ने 9-10 मई की रात पाकिस्तान के 11 एयरफोर्स बेस पर जवाबी कार्रवाई की, जिनमें नूर खान, रफीकी, मुरिद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चुनीयन, सरगोधा, स्कारु, भोलारी और जैकोबाबाद शामिल हैं।
India ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया
यह पहला मौका था जब किसी देश ने परमाणु क्षमता से लैस राष्ट्र के एयरफोर्स कैंपों को सफलतापूर्वक नुकसान पहुंचाया। जैकोबाबाद के शाहबाज एयरबेस की पहले और बाद की तस्वीरों ने तबाही की भयावहता को स्पष्ट किया। इन हमलों में एफ-16 और जेएफ-17 लड़ाकू विमानों वाले बेसों को नुकसान पहुंचा, जिससे पाकिस्तानी वायुसेना की 20 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गई।
वहीं, भोलारी एयरबेस पर हुए हमले में पाकिस्तान के स्क्वाड्रन लीडर उस्मान यूसुफ समेत 50 से अधिक सैन्यकर्मियों की मौत हो गई और कई लड़ाकू विमान नष्ट हो गए। एलओसी पर भी जवाबी कार्रवाई में भारत ने पुंछ-राजौरी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना द्वारा नागरिक इलाकों पर की गई गोलाबारी का सटीक जवाब देते हुए आतंकियों के बंकर और सेना की चौकियों को नष्ट कर दिया।
रहीमयार खान एयरबेस के मलबे में मिली आसिफ अली ज़रदारी की अधजली तस्वीर पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य विफलता का प्रतीक बन गई। India ने केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक नीति, सूचना प्रभुत्व और मनोवैज्ञानिक युद्ध के माध्यम से पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया।
India ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत कृषि भूमि, 93 प्रतिशत जल उपयोग और 25 प्रतिशत जीडीपी इस जल प्रणाली पर निर्भर है। भारत के इस निर्णय से पाकिस्तान को भयानक जल संकट, खाद्य संकट और बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।

