Heart Beat Problem: ऐसा कई लोगों को होता है कि वह जब आराम से कुर्सी पर बैठे हों, मोबाइल चला रहे हों या टीवी देख रहे हों, और ऐसे में ही अचानक दिल की धड़कन तेज महसूस होने लगती है. ऐसा लग सकता है जैसे दिल सीने से बाहर निकल आएगा. कई लोग इसे थकान, तनाव या घबराहट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है. सामान्य रूप से दौड़ने या मेहनत करने पर धड़कन तेज होना स्वाभाविक है, लेकिन बिना किसी शारीरिक गतिविधि के ऐसा होना शरीर के अंदर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. कभी-कभी यह दिल की धड़कन की अनियमितता यानी एरिथमिया (Arrhythmia) जैसी स्थिति की ओर भी इशारा करता है, जिसमें दिल बहुत तेज, बहुत धीमा या अनियमित तरीके से धड़कने लगता है. आइए जानते हैं किन कारणों से इस तरह की स्थिति को झेलना पड़ता है.
एरिथमिया क्या है और क्यों बढ़ता है इसका खतरा?
एरिथमिया एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें दिल की धड़कन सामान्य लय से हट जाती है. यह समस्या तब होती है जब दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है. इससे दिल शरीर में सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता और इसके कारण चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में घबराहट या कमजोरी महसूस हो सकती है. कुछ मामलों में यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है, खासकर पहले पहले से हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी हो. इसलिए अगर आराम करते समय भी बार-बार दिल की धड़कन तेज हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
बैठे-बैठे दिल की धड़कन तेज होने के मुख्य कारण यह भी;
ज्यादा तनाव या एंग्जायटी- मानसिक तनाव, चिंता या पैनिक अटैक से हार्ट रेट अचानक बढ़ सकता है, इस कारण आपको इस तरह की स्थिति देखनी पड़ सकती है.
कैफीन, शराब या धूम्रपान- ज्यादा चाय, कॉफी, शराब या सिगरेट का सेवन हार्ट बीट की गति को प्रभावित कर सकते हैं.
डिहाइड्रेशन- शरीर में पानी की कमी होने पर दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, इस वजह से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है.
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन– पोटैशियम, सोडियम और मैग्नीशियम की कमी से भी धड़कन अनियमित हो सकती है.
लो ब्लड शुगर- शुगर लेवल कम होने पर घबराहट हो सकती है, जिस कारण तेज धड़कनों की समस्या अक्सर देखने को मिलती है.
दिल की पुरानी बीमारियां– जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या कोरोनरी आर्टरी डिजीज आदि की समस्या रहती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.

