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भिक्षु स्वामी जी के ‘अहिंसा’ और ‘अनेकांतवाद’ के सिद्धांत आज की जरूरत : Chief Minister Saini

On: July 8, 2025 7:54 PM
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Chief Minister Saini
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चंडीगढ़। हरियाणा के Chief Minister Saini ने कहा कि महापुरुषों के विचार और सिद्धांत आज भी हमें जीवन जीने की सही दिशा दिखाते हैं। यदि हम उनके आदर्शों को अपनाएं और अपने आचरण में उतारें, तो एक नैतिक और चरित्रवान समाज का निर्माण संभव है।

शहरी निकायों के राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक संध्या में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं Chief Minister Saini उपस्थित

जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण होगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा। यदि हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए एक मजबूत, नैतिक और चरित्रवान समाज का निर्माण सबसे पहली आवश्यकता है। महापुरुषों की प्रेरणा से ही हम यह लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

Chief Minister Saini आज चंडीगढ़ में आचार्य श्री भिक्षु स्वामी जी की 300वीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मंचासीन परम श्रद्धेय मुनिश्री विनय कुमार आलोक जी, मुनिश्री सुधाकर जी, मुनिश्री अभय कुमार आलोक जी, मुनिश्री नरेश जी, स्वामी सम्पूर्णानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज सहित समस्त मुनिजनों को सादर नमन किया और कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस पावन अवसर पर तेरापंथी समाज के श्रद्धालुओं के बीच आने का अवसर मिला।

Chief Minister Saini ने कहा कि देश की धरा संतों की धरा है। संतों के कारण ही हमारी संस्कृति जीवित है। मुख्यमंत्री ने जैन मुनियों की तपस्वी जीवनचर्या की सराहना करते हुए कहा कि वे भौतिकवादी युग में त्याग और संयम की प्रतिमूर्ति हैं। तीर्थंकरों और मुनियों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत आज भी मानव समाज को दिशा देने वाले हैं।

आचार्य भिक्षु स्वामी जी समाज-सुधारक और वैचारिक क्रांति के अग्रदूत Chief Minister Saini

मुख्यमंत्री Chief Minister Saini ने कहा कि आचार्य श्री भिक्षु स्वामी जी केवल एक मुनि नहीं, बल्कि एक साहसी और क्रांतिकारी विचारक थे। उन्होंने धर्म में व्याप्त कुरीतियों पर चोट की और अध्यात्म को तर्कसंगत दिशा दी। विक्रम संवत 1783 में कंटालिया गांव में जन्मे ‘भीखण’ का आचार्य बनने तक का जीवन त्याग, तपस्या और सत्य की साधना से भरा हुआ था।

उन्होंने विक्रम संवत् 1817 में तेरापंथ की स्थापना की, जो केवल एक पंथ की शुरुआत नहीं थी, बल्कि धर्म को उसके सबसे शुद्ध रूप में पुनः स्थापित करने का एक साहसी आंदोलन था। ‘एक आचार्य, एक विधान और एक विचार’ का सिद्धांत तेरापंथ का आधार बना, जो अनुशासन, एकता और निष्ठा का प्रतीक है।

भिक्षु स्वामी जी के विचार आज के युग में भी प्रासंगिक Chief Minister Saini

मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य भिक्षु जी की शिक्षाएं आज के युग में भी अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि अहिंसा केवल मारपीट न करना ही नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से पवित्र होना ही सच्ची अहिंसा है। आज के तनावपूर्ण और असहिष्णुता से भरे माहौल में यह विचार समाज को जोड़ने का काम कर सकता है।

उन्होंने अनेकांतवाद की चर्चा करते हुए कहा कि यह दर्शन लोकतंत्र की आत्मा है, जो विभिन्न दृष्टिकोणों के सम्मान की प्रेरणा देता है। अपरिग्रह का संदेश आज की उपभोक्तावादी प्रवृत्ति, संग्रह और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक नैतिक आधार है।

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