देहरादून। मुनस्यारी में इको हट निर्माण के दौरान वन कानूनों के उल्लंघन के गंभीर मामले पर Central government ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार को इस मामले में कार्रवाई रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा) शुरू करने का निर्देश दिया है।
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यह कदम आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में जहां आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने में 7 माह का समय लगा। वहीं Central government ने ततपरता दिखाते हुए महज 48 घंटे के अंदर एक्शन -टेकन रिपोर्ट राज्य सरकार से मांग ली है, वहीं मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
डीएफओ पर लगे थे गंभीर आरोपः यह मामला मुनस्यारी में 2019 में हुए ₹1.63 करोड़ के इको हट निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। संजीव चतुर्वेदी की करीब 500 पेज की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन पिथौरागढ़ के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) डॉ. विनय भार्गव को इन उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
रिपोर्ट में आरोप है कि निर्माण कार्य बिना टेंडर के कराया गया, सामग्री की आपूर्ति के लिए निजी फर्म का चयन भी बिना अनुमोदन के किया गया, और एक निजी संस्था को पर्यटन से प्राप्त आय का 70 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी उच्च स्तरीय मंजूरी के हस्तांतरित कर दिया गया।
Central government का सख्त आदेशः देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा 13 अगस्त को जारी एक पत्र में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के प्रधान सचिव (वन) को निर्देश दिया है कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
पत्र में साफ कहा गया है कि उल्लंघन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जाए और उनके खिलाफ अधिनियम की धारा 3ए/3बी के तहत कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने के लिए एक अधिकारी नामित करे।
Central government मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी
आपराधिक और मनी लॉन्डरिंग की जांच की सिफारिशः संजीव चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत 500 से अधिक पृष्ठों की जांच रिपोर्ट में डॉ. भार्गव के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और मनी लॉन्डरिंग की जांच के लिए मामले को सीबीआई और ईडी को सौंपने की भी सिफारिश की गई है। यह इसलिए क्योंकि आरोपित अपराध अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आते हैं। इस मामले में, राज्य सरकार ने पहले ही 18 जुलाई को डॉ. विनय भार्गव को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

