*नाबालिक युवती का मामला न्यायालय में विचाराधीन, युवती माता पिता की सुपुर्दगी में, पिता ने उसका किया बाल विवाह*
#माता-पिता एवं नाबालिक युवती के साथ विवाह रचाने वाले युवक के विरुद्ध हुआ मामला दर्ज#
बदायूं: जनपद के थाना क्षेत्र के एक गांव निवासिनी पीड़िता का मामला माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में विचाराधीन है मामला विचाराधीन होने के चलते युवती ने माननीय न्यायालय को अपनी आयु 16 वर्ष बताई जिसके चलते नाबालिग युवती को न्यायालय के आदेश पर सुपुर्द कर दिया गया!
जानकारी के मुताबिक जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था तो अपनी सुपुर्दगी में लेने वाले उसके माता-पिता (दंपति) ने मामला माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद अपनी 16 वर्षीय नाबालिक युवती का बाल विवाह कर दिया था जिसकी जानकारी होने पर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर सुपुर्दगी में लेने वाले माता-पिता (दंपत्ति) तथा नाबालिग युवती से शादी करने वाले युवक के विरुद्ध ग्राम के ही एक समाज सेवी द्वारा थाना पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र पर अपराध संख्या 26 बाल विवाह अधिनियम धारा 10 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम धारा 9 के अंतर्गत मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।
ज्ञात रहे 22 सितंबर को नाबालिक बालिका को माननीय न्याय पीठ के आदेश पर राजकीय बल ग्रह बाल का परसिंदी खेड़ा लखनऊ भेजा गया था जहां 28 अक्टूबर वर्ष 2025 को माननीय न्यायालय के समक्ष युवती ने अपनी आयु 16 वर्ष बताते हुए अपने पिता के साथ घर जाने की इच्छा प्रकट की थी इसके कारण माननीय न्यायालय ने नाबालिक युवती को उसके माता-पिता की सुपुर्दगी में दे दिया गया नाबालिग युवती माता-पिता के घर रह रही थी।

