Amroha News-अमरोहा (धनौरा) | कृषि एवं पशुपालन डेस्क बदलते मौसम के कारण पशुओं में तेजी से फैल रही बीमारियों और बांझपन जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए जनपद अमरोहा के ग्राम शिशोवाली में एक भव्य ‘निःशुल्क पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषि गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। यह विशेष आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (मेरठ) और पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में, ‘इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड’ के वित्तीय सहयोग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक और मुख्य अतिथि राजीव तरारा ने फीता काटकर किया।
“आधुनिक तकनीक अब गांव-गांव पहुंच रही है”
शिविर को संबोधित करते हुए विधायक राजीव तरारा ने विश्वविद्यालय और पशुपालन विभाग की इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों के समन्वित प्रयासों से आज आधुनिक तकनीक गांव-गांव और किसानों के द्वार तक पहुंच रही है। किसान वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाकर अपने पशुओं की उत्पादकता और अपनी आय दोनों बढ़ा सकते हैं।”
‘प्रत्येक शनिवार पशुपालक के द्वार’ अभियान
कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की “प्रत्येक शनिवार पशुपालक के द्वार” पहल के अंतर्गत विशेषज्ञों की टीम हर शनिवार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न गांवों में जाकर पशुपालकों को उनके घर पर ही अत्याधुनिक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीण पशुपालन का स्वरूप बदल रहा है।
पशुपालन विभाग की अपील: टैगिंग और ‘भारत पशुधन App’ पर कराएं पंजीकरण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आभा दत्त ने किसानों को जागरूक करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
खुरपका-मुंहपका (FMD) से बचाव: विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर पशुओं का खुरपका-मुंहपका टीकाकरण कर रही हैं, सभी पशुपालक इसका लाभ उठाएं।
कान में टैग (Ear Tagging): अपने पशुओं के कान में अनिवार्य रूप से टैग लगवाएं और ‘भारत पशुधन ऐप’ (Bharat Pashudhan App) पर अपना और अपने पशुओं का पंजीकरण जरूर कराएं।
गन्ने की फसल: बीज और भूमि उपचार की वैज्ञानिक विधि
गोष्ठी में कृषि विज्ञान के प्रोफेसर रमेश सिंह ने फसल रोग प्रबंधन पर किसानों को बहुमूल्य टिप्स दिए:
गन्ने की बुवाई से पहले बीज उपचार के लिए ‘ट्राइकोडर्मा’ अथवा ‘कार्बेन्डाजिम’ का प्रयोग करें।
भूमि उपचार और कीटों से बचाव के लिए ‘क्लोरोपायरीफॉस’ के संतुलित उपयोग की सलाह दी गई।
125 से अधिक पशुओं की अल्ट्रासाउंड और माइक्रोस्कोपी से हुई जांच
परियोजना प्रभारी डॉ. अमित वर्मा के नेतृत्व में डॉ. प्रेम सागर मौर्य, डॉ. विकास सचान, डॉ. अरबिंद सिंह, डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. दीपाक्षी और डॉ. भागेश सिंह की विशेषज्ञ टीम ने शिविर में मोर्चा संभाला।
टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों (जैसे अल्ट्रासाउंड मशीन और माइक्रोस्कोप) की मदद से 125 से अधिक पशुओं की विस्तृत जांच की।
इस दौरान गर्भ परीक्षण, प्रजनन संबंधी समस्याओं का निदान, परजीवी जांच और सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण कर पशुपालकों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।
इस वृहद और सफल शिविर के आयोजन में स्थानीय पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भागेश सिंह का विशेष और सराहनीय योगदान रहा।

