Amroha Mission 500-पानी की किल्लत और लगातार गिरते भूजल स्तर के इस दौर में उत्तर प्रदेश का अमरोहा जिला एक नई मिसाल पेश कर रहा है। जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स की खास पहल ‘अमरोहा मिशन 500’ (अमृत सरोवर योजना) अब धरातल पर अपना शानदार असर दिखाने लगी है। यह योजना न सिर्फ जल संरक्षण की दिशा में एक गेम चेंजर साबित हो रही है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में आजीविका और रोजगार के नए दरवाजे भी खोल रही है। आइए जानते हैं कैसे प्रशासन की इस मुस्तैदी ने जिले की तस्वीर बदल कर रख दी है।
291 तालाबों ने ली राहत की सांस, बने ‘मॉडल अमृत सरोवर’
जिले में जल संकट से निपटने के लिए अमरोहा मिशन 500 के तहत कुल 501 तालाबों को नया जीवन देने का बड़ा लक्ष्य रखा गया था। प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए सबसे पहले 340 तालाबों को तत्काल काम शुरू करने के लिए चिन्हित किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रशासनिक सख्ती और सही मॉनिटरिंग के चलते इनमें से 291 तालाबों का जीर्णोद्धार पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। बाकी बचे तालाबों पर भी युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। सबसे खास बात यह है कि इनमें से कई तालाबों को ‘मॉडल अमृत सरोवर’ की तर्ज पर विकसित किया गया है, जो इस योजना की सफलता की गवाही दे रहे हैं।
75 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिला बंपर रोजगार
यह पहल सिर्फ पानी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में ‘रोजगार गारंटी’ का एक मजबूत आधार बन गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें तो मनरेगा (जिसका वर्तमान नाम ‘विकसित भारत-जी राम जी’ है) के तहत बड़े पैमाने पर रोजगार दिया गया है। अब तक जिले के 62,947 परिवारों के कुल 75,310 लोगों को इस योजना के जरिए काम मिल चुका है। प्रशासन का सीधा फोकस यह है कि कुल कार्यों का 65 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा जल संरक्षण और विशेष रूप से तालाबों के निर्माण पर खर्च हो।
विकास में पारदर्शिता: ‘नरेगा सॉफ्ट’ और ग्राम सभा की अहम भूमिका
सरकारी योजनाओं में अक्सर बजट को लेकर सवाल उठते हैं, लेकिन अमरोहा में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। तालाबों की खुदाई, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण में ‘विकसित भारत-जी राम जी’ मुख्य भूमिका निभा रहा है। इसमें पहले से कोई भारी-भरकम बजट पास नहीं होता, बल्कि मौके पर जितना काम होता है, शासन से उसी के हिसाब से फंड जारी किया जाता है।
गांव वालों की सीधी भागीदारी तय करने के लिए ग्राम सभा ही तय करती है कि कहां काम होना है और उसका सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) भी वही करती है। 15 दिन के अंदर मजदूरों को जॉब कार्ड जारी किए जा रहे हैं और ‘नरेगा सॉफ्ट’ (NREGA Soft) पर सारा डेटा ऑनलाइन दर्ज हो रहा है। इससे योजना में शत-प्रतिशत जवाबदेही तय हुई है।
बहुआयामी उपयोग: सिर्फ पानी नहीं, कमाई और खूबसूरती का भी साधन
इन अमृत सरोवरों के फायदे बहुआयामी हैं। पुराने तालाबों से गाद निकाली गई है, जिससे बारिश का पानी ज्यादा जमा हो रहा है और जिले के गिरते भूजल स्तर में सुधार के स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं। इसके अलावा, प्रशासन ने तालाबों के किनारे मनरेगा के तहत पेड़ लगवाए हैं और टहलने के लिए पाथवे बनाए हैं। अन्य विभागों के तालमेल (कन्वर्जेंस) से यहां बैठने के शानदार इंतजाम भी किए गए हैं। अब इन तालाबों का इस्तेमाल सिर्फ सिंचाई और वर्षा जल संचयन के लिए नहीं, बल्कि मछली पालन (मत्स्य पालन) और पशुपालन जैसी गतिविधियों के लिए भी हो रहा है, जिससे ग्रामीणों की स्थायी कमाई हो रही है।
आगे की राह: अवैध कब्जों से मुक्त होंगे शेष तालाब
प्रशासन की यह विकास यात्रा यहीं रुकने वाली नहीं है। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन ने एक सख्त मास्टर प्लान तैयार किया है। इस मिशन के तहत उन तालाबों को भी चिन्हित कर लिया गया है, जिन पर वर्तमान में अवैध कब्जा है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में इन सभी तालाबों को कब्जामुक्त कराकर उनका भी कायाकल्प किया जाएगा।

