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सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी, मरीज नर्सिंग होम में जाने को विवश: Akhilesh Yadav

On: July 11, 2025 12:56 PM
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Akhilesh Yadav
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने का आरोप लगाते हुये कहा कि सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी और बदहाली की वजह से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर हो रहे है।

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Akhilesh Yadav ने गुरुवार को जारी बयान में कहा “ उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। उप मुख्यमंत्री की नज़र अपने विभाग के बजाय मुख्यमंत्री की कुर्सी पर होने की वजह से हर तरफ मनमानी और बदहाली दिखाई दे रही है। अचरज तो यह है कि उनकी सरकार में बिना खून निकाले रिपोर्ट देने का तरीका भी खोज लिया गया है।

कानपुर में दो सीएमओ एक कुर्सी पर झगड़ पड़े तो पुलिस बुलानी पड़ गई। डीसीएम साहब अपनी नाकामी छुपाने के लिए छापेबाजी करके बैठ जाते है। असर कुछ होता नहीं है।”

Akhilesh Yadav ने कहा “ पिछले दिनों डिप्टी साहब गोंडा के मेडिकल कॉलेज गए जहां हर तरफ अव्यवस्था थी। अस्पताल में डॉक्टर जींस-टीशर्ट में थे। मरीजों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को चादर भी नहीं मिलती है। घर की शाल और कम्बल बिछाकर मरीज लेटे दिखाई पड़े। मंत्री जी ने फटकार तो बहुत लगाई पर उनके 37 मिनट के दौरे के बाद कुछ भी नहीं बदला अस्पताल अपने ढर्रे पर आ गया।”

सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने कहा कि झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जमीन पर बैठे मरीज को ड्रिप चढ़ाए जाने का दृष्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है। जगदीशपुर अमेठी में इकलौता ट्रामासेंटर कहने भर को इमर्जेंसी सेवाएं देने के लिए है जबकि यहां प्राथमिक उपचार की भी सही व्यवस्था नहीं है।

उरई ट्रामा सेंटर में घंटों मरीजों को इलाज नहीं मिलने की शिकायते हैं तो पीलीभीत ओर फतेहपुर मेडिकल कॉलेज में भी इलाज की सुविधा नहीं है। हद तो तब हो गई जब हमीरपुर के जिला अस्पताल में बोतल चढ़ा मरीज को पैदल ही वार्ड में भेज दिया गया। हांफते कांपते पहुंचे मरीज की वार्ड में जाते ही सांसे थम गई। ये तो कुछ नमूने है।

Akhilesh Yadav सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी और बदहाली की वजह से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर हो रहे 

उन्होने कहा कि राजधानी लखनऊ में भी स्वास्थ्य सेवाओं की दशा ठीक नहीं कही जा सकती है। वेंटिलेटर होते हुए भी मरीजों की जाने जाती है। बेड होते हुए भी मरीज स्ट्रेचर पर इलाज कराते हैं। गंभीर मरीजों को भी एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने का खेल बंद नहीं हो रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी है और महंगी मशीने जंग खा रही हैं।

श्री यादव ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी और बदहाली की वजह से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर हो रहे है। गलत इलाज से आए दिन मौतें होने पर हंगामा हो रहा है। मरीजों से पैसो की खुली लूट होने से लोग परेशान हैं।

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