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डेंगू बुखार: सही पहचान, सही तरल प्रबंधन और समय पर उपचार से बच सकती है जान : डॉ0 आदित्य गुप्ता

On: September 26, 2026 4:20 PM
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डेंगू बुखार: सही पहचान, सही तरल प्रबंधन और समय पर उपचार से बच सकती है जान : डॉ0 आदित्य गुप्ता

डेंगू हर वर्ष बरसात और उसके बाद के मौसम में एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य समस्या बन जाता है। यह डेंगू वायरस से होने वाली बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है।यह मच्छर आमतौर पर दिन में सक्रिय रहता है और घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनपता है।इसलिए डेंगू की रोकथाम की शुरुआत हमारे घर और आसपास से ही होती है।
डेंगू के सामान्य लक्षणों में अचानक तेज बुखार,तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, कमजोरी, मतली-उल्टी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते शामिल हैं। हर मरीज में सभी लक्षण होना जरूरी नहीं है। जांच और उपचार का निर्णय चिकित्सक मरीज की अवस्था के अनुसार करते हैं।

सिर्फ प्लेटलेट काउंट पर ध्यान न दें:-डेंगू को लेकर सबसे आम चिंता प्लेटलेट्स की होती है, लेकिन केवल प्लेटलेट काउंट बीमारी की गंभीरता का पूरा पैमाना नहीं है।रक्तचाप, नाड़ी, रक्तस्राव, पेशाब की मात्रा, हेमेटोक्रिट और मरीज की समग्र क्लिनिकल स्थिति का आकलन अधिक महत्वपूर्ण है।इसलिए बार-बार केवल प्लेटलेट की रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।
बुखार उतरने के बाद भी सावधानी:-कुछ मरीजों में बुखार कम होने के आसपास गंभीर अवस्था विकसित हो सकती है। लगातार पेट दर्द,बार-बार उल्टी,नाक या मसूड़ों से खून,खून की उल्टी या काला मल, अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी, चक्कर, ठंडी-चिपचिपी त्वचा, सांस लेने में कठिनाई अथवा पेशाब कम होना चेतावनी के संकेत (Warning Signs) हैं। ऐसी स्थिति में घर पर प्रतीक्षा न करें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।
उपचार की गाइडलाइन — सरल भाषा में:-डेंगू की कोई सामान्य विशिष्ट एंटीवायरल दवा नहीं है; उपचार मुख्यतः supportive care पर आधारित है।हल्के मरीज, जिनमें warning signs नहीं हैं और जो पर्याप्त तरल ले पा रहे हैं, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आराम, पर्याप्त oral fluids/ORS और निगरानी की आवश्यकता होती है।
बुखार और दर्द के लिए चिकित्सकीय सलाह से पैरासिटामोल का उपयोग किया जा सकता है।एस्पिरिन,आइबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक तथा अन्य NSAIDs से बचना चाहिए, क्योंकि वे रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकते हैं।
Warning signs, shock या गंभीर डेंगू में अस्पताल में भर्ती, लगातार vital monitoring तथा सावधानीपूर्वक IV crystalloid fluid therapy की आवश्यकता हो सकती है।Fluid therapy मरीज के वजन, circulation, hematocrit, urine output और clinical response के अनुसार समायोजित की जाती है।आवश्यकता से अधिक fluid देना भी नुकसानदेह हो सकता है।

प्लेटलेट कब चढ़ाएं:-केवल platelet count कम होने पर prophylactic platelet transfusion हर मरीज में आवश्यक नहीं होता।सक्रिय महत्वपूर्ण रक्तस्राव या अन्य विशेष परिस्थितियों में blood components की जरूरत का निर्णय treating physician मरीज की पूरी clinical condition के आधार पर करते हैं।
गंभीर स्थिति में डॉ. रामनिवास गुप्ता अस्पताल, सहसवान में ब्लड बैंक की सुविधा भी उपलब्ध है।
रोकथाम ही सबसे मजबूत हथियार:-हर सप्ताह घर और आसपास पानी जमा होने वाले स्थानों की जांच करें। कूलर खाली कर साफ करें,पानी की टंकियां ढकें और गमलों की ट्रे,पुराने टायर, बाल्टी व अन्य पात्रों में पानी न रुकने दें।पूरी बांह के कपड़े पहनें और उपयुक्त मच्छररोधी उपाय अपनाएं।
याद रखें—डेंगू से घबराना नहीं है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लेना है।समय पर पहचान, सही चिकित्सकीय निगरानी और उचित तरल प्रबंधन गंभीर डेंगू में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
— डॉ. आदित्य गुप्ता
डॉ राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल,सहसबान , बदायूं
भूतपूर्व डेंगू वार्ड इंचार्ज, हिंदू राव हॉस्पिटल, दिल्ली

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