हरिद्वार-धर्मनगरी में सोमवती अमास्या के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद गंगा स्नान के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, आज मुख्य स्नान पर्व पर लगभग 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाया। आस्था के इस भारी दबाव के आगे धर्मनगरी की तमाम व्यवस्थाएं छोटी पड़ती दिखाई दीं।
12 राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु, ‘हर-हर गंगे’ से गूंजी धर्मनगरी
सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है। यही कारण रहा कि इस पावन संयोग पर पुण्य अर्जित करने के लिए देश के 12 प्रमुख राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे:
प्रमुख राज्य: उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से लाखों की संख्या में तीर्थयात्री यहां पहुंचे।
पैर रखने की जगह नहीं: ब्रह्मकुंड और क्षेत्र का आलम यह था कि भोर की पहली किरण के साथ ही घाट पूरी तरह से पैक हो गए। स्थिति यह थी कि श्रद्धालुओं को घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही थी। लोग कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते और गंगा में डुबकी लगाते दिखे।
हाईवे पर लगा मीलों लंबा जाम, रेंगते रहे वाहन
लाखों श्रद्धालुओं के एक साथ वाहनों के साथ पहुंचने से के एंट्री पॉइंट्स और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
दिल्ली- हाईवे पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं।
हालांकि, पुलिस-प्रशासन ने पहले से ही रूट डायवर्जन प्लान लागू किया था और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी, लेकिन निजी वाहनों और श्रद्धालुओं की भारी आमद के कारण शहर के भीतर भी कई चौराहों पर ट्रैफिक रेंगता नजर आया।
चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रही पुलिस और पैरामिलिट्री
मेले की संवेदनशीलता और वीआईपी (VIP) सुरक्षा को देखते हुए पूरे मेला क्षेत्र को कई जोन और सेक्टरों में बांटा गया था।
सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल, पीएसी (PAC) और जल पुलिस के गोताखोरों की तैनाती की गई थी।
सीसीटीवी (CCTV) और ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
गंगा के तेज बहाव को देखते हुए जल पुलिस के जवान नावों और राफ्ट के साथ लगातार घाटों के पास गश्त करते रहे, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।

