नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। पेपर लीक होने के बाद नीट परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस बीच, तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने NEE को खत्म करने की मांग कर दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए NEET परीक्षा के सिस्टम को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि छात्रों को मेडिकल कोर्सेज में दाखिला उनकी कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर ही मिलना चाहिए। विजय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि चिकित्सा पाठ्यक्रमों में NEET आधारित प्रवेश को रद्द किया जाए और संबंधित राज्यों को कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर सीटें भरने की अनुमति दी जाए।
क्या है पूरा मामला?
बीती 3 मई 2026 को देशभर के 5,432 केंद्रों पर नीट की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 22 लाख छात्र शामिल हुए थे। अकेले तमिलनाडु से 1.4 लाख उम्मीदवार परीक्षा में बैठे थे। लेकिन पेपर लीक की खबरों के बाद, भारत सरकार की मंजूरी से इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। अब इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई है।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब नीट का पेपर लीक हुआ है। 2024 में भी ऐसी ही धांधली हुई थी। पूर्व इसरो चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की कमेटी ने सुधार के लिए 95 सुझाव दिए थे, लेकिन इसके बावजूद दो साल के भीतर दोबारा पेपर लीक होना सिस्टम की बड़ी कमजोरी दिखाता है।
सीएम ने कहा कि NEET की वजह से ग्रामीण इलाकों, सरकारी स्कूलों और तमिल माध्यम से पढ़ने वाले गरीब बच्चों को मेडिकल की पढ़ाई में भारी नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर तमिलनाडु सरकार के पुराने रुख को दोहराते हुए मांग की है कि NEET को पूरी तरह खत्म किया जाए। राज्यों को यह अधिकार मिले कि वे MBBS, BDS और AYUSH कोर्स की सीटें 12वीं कक्षा के नंबरों (मेरिट) के आधार पर भर सकें।

