इंटरनेशनल डेस्क/टेक न्यूज़: मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहा तनाव कम होने के बजाय हर दिन एक नया और खतरनाक रूप लेता जा रहा है। अब तक ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा यह टकराव तेल के जहाजों, मिसाइलों और एयरस्ट्राइक तक ही सीमित था, लेकिन अब यह युद्ध एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जो पूरी दुनिया को डरा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लड़ाई अब ‘डेटा वॉर’ (Data War) में बदलती हुई दिखाई दे रही है। ईरान से जुड़े मीडिया और सुरक्षा एजेंसियों ने इशारा किया है कि उनका अगला टारगेट समंदर के नीचे बिछी वो इंटरनेट केबल्स (Undersea Cables) हो सकती हैं, जिनसे लगभग पूरी दुनिया का इंटरनेट चलता है।
ईरान के निशाने पर क्यों है होर्मुज स्ट्रेट?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से जुडे़ मीडिया ने हाल ही में पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के नीचे मौजूद केबल नेटवर्क को प्रमुखता से हाइलाइट किया है।
डिजिटल चोकपॉइंट: दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ कच्चे तेल के व्यापार का रास्ता ही नहीं है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया का भी एक बहुत बड़ा चोकपॉइंट है।
95% इंटरनेट का आधार: यहां और रेड सी (लाल सागर) के आस-पास करीब 15 से 20 इंटरनेशनल फाइबर ऑप्टिक केबल्स गुजरती हैं, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच डेटा ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा मैनेज करती हैं। दुनिया का 95% से ज्यादा इंटरनेट डेटा इन्हीं अंडरसी केबल्स से होकर गुजरता है।
केबल कटी तो दुनिया और भारत पर क्या होगा असर?
अगर इस क्षेत्र में एक साथ कई केबल्स को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो इसका असर केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल इंटरनेट कनेक्टिविटी बुरी तरह चरमरा जाएगी।
भारत को है बड़ा खतरा: भारत इस मामले में पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भारत का करीब 60% इंटरनेट ट्रैफिक पश्चिम की तरफ यानी मिडिल ईस्ट और यूरोप जाने वाली इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है।
धीमी हो जाएगी स्पीड: केबल्स कटने की स्थिति में भारत में इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी हो सकती है।
ठप हो सकते हैं ये सिस्टम: इंटरनेशनल वेबसाइट्स, क्लाउड सर्विसेस (Cloud Services), ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और UPI जैसी जरूरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, भारत के पास पूर्व की तरफ (सिंगापुर और पैसिफिक के जरिए) एक बैकअप रास्ता मौजूद है, लेकिन वह पूरे ट्रैफिक का भार नहीं संभाल सकता।
क्या यह सिर्फ गीदड़भभकी है या असली खतरा?
अगर समंदर के नीचे नुकसान ज्यादा हुआ और रिपेयरिंग टीम वहां तक नहीं पहुंच सकीं, तो यह ब्लैकआउट या स्लोडाउन की समस्या कई हफ्तों या महीनों तक खिंच सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान द्वारा केबल नेटवर्क को हाइलाइट करना फिलहाल एक ‘स्ट्रैटेजिक सिग्नल’ (रणनीतिक धमकी) है। सबसे बड़ी सच्चाई यह भी है कि यदि ईरान इन इंटरनेशनल केबल्स को काटता है, तो उसका खुद का इंटरनेट और बैंकिंग सिस्टम भी पूरी तरह ठप हो जाएगा।

