*नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बावजूद महिलाओं के वास्तविक प्रतिनिधित्व पर प्रश्नचिन्ह*
#बदायूं जनपद में नारियों को नहीं मिल रहा प्रतिनिधित्व

बदायूं: जनपद बदायूं में कई महिलाओं को जनप्रतिनिधित्व होने के बावजूद भी उन्हें जनप्रतिनिधित्व से वांछित रखा जा रहा जिससे जनपद में नारी शक्ति बंधन अधिनियम की हवा निकलती दिखाई दे रही है ।भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है। इस अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित कर उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह कदम न केवल लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि एक समावेशी और सशक्त राष्ट्र निर्माण की नींव भी रखता है।
बदायूं जनपद भर में महिलाओं के लिए आरक्षित ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य क्षेत्र पंचायत प्रमुख के अलावा नगर पालिका परिषद अध्यक्ष नगर पालिका सदस्य नगर पंचायत अध्यक्ष सदस्य तथा ग्राम पंचायत सदस्यों में नियुक्त महिलाओं को उनकी आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। महिलाओं के आरक्षित स्थानों पर पुरुष प्रधान जबरन कब्जा किए हुए महिलाओं को जनप्रतिनिधित्व करने में अडंगा डाले हुए हैं। इससे लगता है की बदायूं जनपद में नारी शक्तिबंधन अधिनियम सिर्फ महज औपचारिकता है।
किन्तु यह एक चिंताजनक सत्य है कि आज भी देश के कई हिस्सों में, विशेष रूप से स्थानीय निकायों और जनप्रतिनिधि संस्थाओं में, महिलाओं को केवल औपचारिक प्रतिनिधि बनाकर रखा जाता है। भले ही वे निर्वाचित होकर पद पर आसीन हों, लेकिन वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति प्रायः उनके परिजनों या पुरुष सहयोगियों के हाथों में ही केंद्रित रहती है। यह स्थिति “प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व” की ओर संकेत करती है, जो नारी सशक्तिकरण के मूल उद्देश्य को कमजोर करती है।
एक पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना में यह समस्या और भी जटिल हो जाती है, जहाँ महिलाओं को स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने का अवसर सीमित कर दिया जाता है। कई मामलों में महिला प्रतिनिधियों को प्रशासनिक बैठकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय निर्णयों से दूर रखा जाता है, जिससे उनकी भूमिका केवल नाममात्र की रह जाती है।
इस संदर्भ में आवश्यक है कि:- महिलाओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जाए, प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी वास्तविक और प्रभावी हो, समाज में मानसिकता परिवर्तन लाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं, राजनीतिक दल भी महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाएं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब महिलाएं न केवल पदों पर आसीन हों, बल्कि वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम हों।
अंततः, एक सशक्त महिला ही एक सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। अतः हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि वास्तविक सशक्तिकरण भी मिले।

