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Homeopathy News: विश्व होम्योपैथी दिवस आज। विश्व होम्योपैथी दिवस 10 अप्रैल 2026 पर जाने माने होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अमोल गुप्ता से खास बातचीत पर आधारित।

On: April 10, 2026 8:36 PM
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Homeopathy News: विश्व होम्योपैथी दिवस आज। विश्व होम्योपैथी दिवस 10 अप्रैल 2026 पर जाने माने होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अमोल गुप्ता से खास बातचीत पर आधारित।

क्या है होम्योपैथी का मतलब:-होम्योपैथी की दवा कैसे काम करती है? कैसे शुरू हुआ ‘मीठी गोलियों’ से इलाज का सिलसिला ?
होम्योपैथी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर आपके मन में कई सवाल उठते हैं।इस लेख में हमने सभी मुद्दों पर सहसवान के डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल के मशहूर होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. अमोल गुप्ता से बात करने की कोशिश की है।

आज के समय में भी कई लोग एलोपैथिक दवाओं को छोड़कर कई असाध्य बीमारियों के लिए होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। दुनियाभर में बीमारियों को ठीक करने के लिए लोगों की दूसरी च्वाइस होम्योपैथी होती है। इसमें कई तरीके से मरीज को ठीक करने की कोशिश की जाती है। होम्योपैथिक दवा को आप खा सकते हैं, सूंघ सकते हैं और शरीर पर लगा भी सकते हैं। ऐसे में समय पर समय पर होम्योपैथी ट्रीटमेंट और उसकी दवाओं के असर को लेकर कई सवाल उठते आए हैं लेकिन साइंस भी अब होम्योपैथी को मान्यता देती है। सहसवान के होम्योपैथिक डॉ. अमोल गुप्ता का मानना है कि कई रोगों के लिए होम्योपैथी की दवा बेहद कारगर है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। हालांकि उनके अनुसार, किसी गंभीर आपातकालीन बीमारी के इलाज के लिए रोगी को केवल होम्योपैथ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए वरना इसके नुकसान भी हो सकते हैं। होम्योपैथिक दवाईयां क्या हैं, उनके फायदे, नुकसान और प्रयोग के बारे में हमारी टीम ने विस्तार से बात की डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल सहसवान के होम्योपैथिक एक्सपर्ट डॉ अमोल गुप्ता से ।

क्या है होम्योपैथ का मतलब:-होम्योपैथी की खोज एक जर्मन चिकित्सक, डॉ. क्रिश्चन फ्रेडरिक सैमुएल हैनिमैन (1755-1843), द्वारा अठारहवीं सदी के अंत के दशकों में की गयी थी।
होम्योपैथी शब्द दो शब्दों से बनता है, होम्यो और पैथोज़।दरअसल होम्यो का मतलब होता है एक जैसा और पैथोज़ का मतलब होता है बीमारी। यह “सम: समम् शमयति” या “समरूपता” दवा सिद्धांत पर आधारित एक चिकित्सीय प्रणाली है। यह दवाओं द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है, जिसमें किसी स्वस्थ व्यक्ति में प्राकृतिक रोग का अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न किया जाता है, जिससे रोगग्रस्त व्यक्ति का उपचार किया जा सकता है। इस पद्धति में रोगियों का उपचार न केवल होलिस्टिक दृष्टिकोण के माध्यम से, बल्कि रोगी की व्यक्तिवादी विशेषताओं को समझ कर उपचार किया जाता है। “समरूपता” के सिद्धांत की इस अवधारणा को हिप्पोक्रेट्स और पेरासेलसस द्वारा भी प्रतिपादित किया गया था, लेकिन डॉ. हनिमैन ने इस तथ्य के बावजूद कि वह एक ऐसे युग में रहते थे, जहाँ आधुनिक प्रयोगशाला के तरीके लगभग अज्ञात थे, इसे वैज्ञानिक स्तर पर सिद्ध किया।
*हर साल 10 अप्रैल को होम्यौपैथी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विश्व होम्योपैथी दिवस 10 अप्रैल 2026 पर जाने – माने होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. अमोल गुप्ता से खास बातचीत पर आधारित।

क्या है होम्योपैथी का मतलब:-होम्योपैथी की दवा कैसे काम करती है? कैसे शुरू हुआ ‘मीठी गोलियों’ से इलाज का सिलसिला ?
होम्योपैथी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर आपके मन में कई सवाल उठते हैं। इस लेख में हमने सभी मुद्दों पर सहसवान के डॉ. राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल के मशहूर होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ.अमोल गुप्ता से बात करने की कोशिश की है।

आज के समय में भी कई लोग एलोपैथिक दवाओं को छोड़कर कई असाध्य बीमारियों के लिए होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं।दुनियाभर में बीमारियों को ठीक करने के लिए लोगों की दूसरी च्वाइस होम्योपैथी होती है। इसमें कई तरीके से मरीज को ठीक करने की कोशिश की जाती है। होम्योपैथिक दवा को आप खा सकते हैं, सूंघ सकते हैं और शरीर पर लगा भी सकते हैं। ऐसे में समय पर समय पर होम्योपैथी ट्रीटमेंट और उसकी दवाओं के असर को लेकर कई सवाल उठते आए हैं लेकिन साइंस भी अब होम्योपैथी को मान्यता देती है। सहसवान के होम्योपैथिक डॉ.अमोल गुप्ता का मानना है कि कई रोगों के लिए होम्योपैथी की दवा बेहद कारगर है और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है।हालांकि उनके अनुसार, किसी गंभीर आपातकालीन बीमारी के इलाज के लिए रोगी को केवल होम्योपैथ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए वरना इसके नुकसान भी हो सकते हैं। होम्योपैथिक दवाईयां क्या हैं, उनके फायदे, नुकसान और प्रयोग के बारे में हमारी टीम ने विस्तार से बात की डॉ.राम निवास गुप्ता हॉस्पिटल सहसवान के होम्योपैथिक एक्सपर्ट डॉ अमोल गुप्ता से।

कैसे हुआ होम्योपैथी का जन्म:-होम्योपैथी की खोज एक जर्मन चिकित्सक, डॉ. क्रिश्चन फ्रेडरिक सैमुएल हैनिमैन (1755-1843), द्वारा अठारहवीं सदी के अंत के दशकों में की गयी थी।
होम्योपैथी शब्द दो शब्दों से बनता है, होम्यो और पैथोज़ । दरअसल होम्यो का मतलब होता है एक जैसा और पैथोज़ का मतलब होता है बीमारी। यह “सम: समम् शमयति” या “समरूपता” दवा सिद्धांत पर आधारित एक चिकित्सीय प्रणाली है। यह दवाओं द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है, जिसमें किसी स्वस्थ व्यक्ति में प्राकृतिक रोग का अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न किया जाता है, जिससे रोगग्रस्त व्यक्ति का उपचार किया जा सकता है। इस पद्धति में रोगियों का उपचार न केवल होलिस्टिक दृष्टिकोण के माध्यम से, बल्कि रोगी की व्यक्तिवादी विशेषताओं को समझ कर उपचार किया जाता है। “समरूपता” के सिद्धांत की इस अवधारणा को हिप्पोक्रेट्स और पेरासेलसस द्वारा भी प्रतिपादित किया गया था, लेकिन डॉ. हनिमैन ने इस तथ्य के बावजूद कि वह एक ऐसे युग में रहते थे, जहाँ आधुनिक प्रयोगशाला के तरीके लगभग अज्ञात थे, इसे वैज्ञानिक स्तर पर सिद्ध किया।
होन्योपैथी के संस्थापक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन का जन्म 10 अप्रैल, 1755 को सुबह जर्मनी में हुआ। हर साल 10 अप्रैल को होम्यौपैथी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है ।

कैसे बनाई जाती है होम्योपैथी दवा:-कई बार आपके मन में इन छोटी-छोटी सफेद गोलियों को देखकर सवाल आता होगा कि ये कैसे बनाई जाती है। तो होम्योपैथी दवाओं को एक्सपर्ट पेड़-पौधों और धातुओं की मदद से अर्क के रूप में बनाते हैं। इसका इस्तेमाल डायल्यूशन के रूप में किया जाता है। डॉ अमोल के अनुसार, दवा को डायल्यूट रूप में बेहद संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है ताकि बीमारियों पर उसका अधिक असर हो। इसे ही होम्योपैथ में पोटेंसी बढ़ाना कहते हैं या आपने होम्योपैथिक दवाओं की बोतल में इसे सीएच नाम से देखा भी होगा। इस पद्धति में चिकित्सक मरीज की लाइफस्टाइल, उनके खानपान और शरीर की स्थितियों को लेकर विषेश दवा तैयार करेक देते हैं। साथ ही इसकी मात्रा का भी बहुत बारीक रूप से ध्यान रखा जाता है। जबकि एलोपैथी में एक बीमारी के लिए एक ही दवा कई मरीजों के लिए कारगर होती है।

भारत में होम्योपैथी की शुरुआत:-भारत में होम्योपैथी उस समय आरम्भ की गयी थी, जब कुछ जर्मन मिशनरियों और चिकित्सकों ने स्थानीय निवासियों के बीच होम्योपैथिक दवाओं का वितरण करना आरम्भ किया था। तथापि, होम्योपैथी ने भारत में 1839 में उस समय अपनी जड़ पकड़ी, जब डॉ. जॉन मार्टिन होनिगबर्गर ने स्वर-तंत्रों के पक्षाघात के लिए महाराजा रणजीत सिंह का सफलतापूर्वक इलाज किया।डॉ. होनिगबर्गर कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में बस गये और हैजा-चिकित्सक के रूप में लोकप्रिय हो गये।

क्या होम्योपैथिक दवा कारगर होती है।:-अब आपका सबसे बड़ा सवाल कि क्या होम्योपैथिक दवाएं कारगर होती है? एक मरीज को सबसे ज्यादा इस बात से फर्क पड़ता है कि उसकी बीमारी जल्दी ठीक हो जाए। फिर चाहे दवा होम्योपैथिक हो या एलोपैथिक। कई लोग एलोपैथिक दवाएं खाकर थक जाते हैं, तो होम्योपैथ का सहारा लेते हैं। चिकित्सकों के अनुसार यह कई असाध्य बीमारियों में कारगर है और इसके इस्तेमाल से जटिल एवं जीर्ण रोगों का उपचार संभव है लेकिन जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि किसी गंभीर बीमारी में आपको एलोपैथ का सहारा लेना चाहिए।डॉ अमोल ने कहा कि कई बीमारियों में तो आप एलोपैथ और होम्योपैथ दोनों का सहारा ले सकते हैं। इस दौरान होम्योपैथ सहायक दवा के रूप में काम करती है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट जैसी बीमारियों में सही डॉक्टर का चुनाव करना बहुत जरूरी है।

लेकिन फिर भी हम आपको यह सलाह देते हैं कि अपनी स्थिति के अनुसार, स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए आप उचित चिकित्सा पद्धति का सहारा लें और होम्योपैथ पद्धति द्वारा सही डॉक्टर से ही इलाज कराएं ताकि आपको इसका भरपूर लाभ मिल सके।

होम्योपैथिक पद्धति की उपयोगिता:-होम्योपैथिक दवाएं लागत प्रभावी,रुचिकर हैं, इनका कोई प्रतिकूल पार्श्व प्रभाव नहीं है और इनका आसानी से सेवन किया जा सकता है। कुछ मामलों में, बोझिल और महंगे नैदानिक उपचार विधियों पर निर्भर रहे बिना रोगियों के लक्षणों के आधार पर दवाओं को निर्धारित किया जाता है। होम्योपैथी, मनोदैहिक विकारों, स्व-प्रतिरक्षित बीमारियों, बुढ़ापे और बाल चिकित्सा विकारों, गर्भावस्था के दौरान होने वाली बीमारियों, दुःसाध्य त्वचा रोगों, जीवन शैली से सम्बंधित विकारों और एलर्जी, आदि के उपचार में उपयोगी रही है। होम्योपैथी की, कैंसर, एचआईवी/ एड्स जैसे लाइलाज पुराने मिआदी रोग वाले मरीजों और रुमेटी गठिया आदि जैसी विकलांग बनाने वाली बिमारियों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में एक सकारात्मक भूमिका भी है। इसकी लोकप्रियता दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है।रिपोर्ट-जयकिशन सैनी 

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