नई दिल्ली: रसोई गैस के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद अहम और सख्त आदेश जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की लाइन पहुंच चुकी है, वहां के उपभोक्ताओं को हर हाल में 3 महीने के भीतर अपने LPG कनेक्शन को PNG में बदलना होगा। अगर उपभोक्ता ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके घरों में LPG सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह रोक दी जाएगी।
इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में गैस पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना और बार-बार सिलेंडर बुक करने के झंझट को खत्म करना है।
सरकार को क्यों लेना पड़ा यह बड़ा फैसला?
वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) में चल रहे युद्ध और अन्य वैश्विक सप्लाई चेन की बाधाओं के कारण देश में LPG की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस संकट से निपटने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
मकसद: सरकार का लक्ष्य है कि जिन शहरी इलाकों में पाइपलाइन (PNG) मौजूद है, वहां से LPG की निर्भरता खत्म की जाए, ताकि उन सिलेंडरों की सप्लाई उन ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में की जा सके, जहां पाइपलाइन बिछाना संभव नहीं है।
तेल सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले के संदर्भ में कहा है, “इस संकट को अवसर में बदला गया है।”
किसे मिलेगी छूट और क्या है नियम?
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026’ के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि:
तकनीकी रूप से संभव होने पर घरों को 3 महीने में PNG पर स्विच करना अनिवार्य होगा, अन्यथा LPG सप्लाई रोक दी जाएगी।
छूट (NOC): यदि किसी घर तक तकनीकी कारणों से PNG पाइपलाइन पहुंचाना संभव नहीं है, तो संबंधित विभाग ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी करेगा। केवल इसी स्थिति में उपभोक्ता को LPG सिलेंडर की सप्लाई जारी रहेगी।
PNG कनेक्शन के लिए ‘सुपरफास्ट’ व्यवस्था
इस नई योजना को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने नियम बेहद आसान और सख्त कर दिए हैं:
48 घंटे में कनेक्शन: आवासीय क्षेत्रों में पाइपलाइन की अनुमति अब सिर्फ 3 कार्यदिवसों में मिलेगी और अंतिम छोर (Final Mile) तक PNG कनेक्शन 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराया जाएगा।
अधिकारियों पर नकेल: पाइपलाइन बिछाने की अनुमति देने में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों के साथ कार्रवाई की जाएगी। यदि तय समय में अनुमति नहीं मिली, तो उसे ‘स्वीकृत’ (Deemed Approval) मान लिया जाएगा।
कंपनियों को चेतावनी: अप्रूवल मिलने के 4 महीने के भीतर पाइपलाइन बिछाना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर कंपनियों को भारी जुर्माना देना होगा और उनका एकाधिकार खत्म हो जाएगा।
इस पूरे आदेश और प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए PNGRB (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

