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लंच टाइम में रेलकर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए 

On: February 12, 2026 8:21 PM
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amroha news
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अमरोहा रेलवे स्टेशन आज लंच आवर में गरमागरम हो उठा। उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (शाखा गजरौला) के बैनर तले रेलकर्मियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। एनएफआईआर/यूआरएमयू के आह्वान पर आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में रेलकर्मी एकजुट हुए और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारे लगाए। पूरा स्टेशन उनके “हर-हर” जैसे जयघोष से नहीं, बल्कि “हमारी मांगें पूरी करो” जैसे नारों से गूंज उठा।

रेलकर्मियों ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी पुरानी मांगों को दोहराया। उन्होंने सबसे पहले 2025 तक के सभी रिक्त पदों को तुरंत भरने की मांग की। उनका कहना है कि खाली पड़े पदों की वजह से काम का बोझ बढ़ रहा है और कर्मचारियों पर दबाव आ रहा है। दूसरी बड़ी मांग थी आठवें वेतन आयोग का गठन करना। रेलकर्मी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं ताकि उनकी सैलरी में उचित बढ़ोतरी हो सके।

सबसे ज्यादा गुस्सा नई पेंशन योजना (एनपीएस) को लेकर दिखा। कर्मचारियों ने मांग की कि एनपीएस को पूरी तरह खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से लागू किया जाए। उनका कहना है कि नई स्कीम में रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा नहीं मिल रही, जिससे उनका भविष्य खतरे में है। इसके अलावा तकनीकी कैटेगरी के 10 प्रतिशत पदों को दूसरे विभागों में ट्रांसफर करने के फैसले पर भी उन्होंने कड़ा विरोध जताया। रेलकर्मियों का मानना है कि इससे उनकी कैटेगरी कमजोर हो रही है और विभागीय काम प्रभावित हो रहा है।

प्रदर्शन में रेलवे में बढ़ते निजीकरण के खिलाफ भी आवाज बुलंद हुई। कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण से रेलवे की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने विभिन्न विभागों में रिस्क अलाउंस देने की मांग भी उठाई, क्योंकि काम की प्रकृति जोखिम भरी है।

शाखा सचिव कैलाश चंद्र के नेतृत्व में हुआ धरना

यह पूरा प्रदर्शन उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन शाखा गजरौला के शाखा सचिव कैलाश चंद्र के नेतृत्व में हुआ। उन्होंने रेलकर्मियों को एकजुट किया और प्रशासन को साफ चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और बड़े आंदोलन हो सकते हैं। धरने में शामिल रेलकर्मियों की संख्या देखकर लग रहा था कि वे अपनी बात मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

लंच आवर में होने के कारण यह प्रदर्शन स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों की नजरों में भी आया। कई लोगों ने रेलकर्मियों का समर्थन किया और उनकी मांगों को जायज बताया। रेलकर्मी मानते हैं कि उनकी ये मांगें सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे रेलवे सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए हैं।

अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन इन मांगों पर कितनी जल्दी ध्यान देते हैं। रेलकर्मियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अगर अनसुना किया गया तो आगे का रास्ता और सख्त हो सकता है।

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