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गहलोल मजरे की गौशाला अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ी, ठंड एवं भूख से दो गोवंशीयों की हुई मौत,

On: November 25, 2025 8:54 PM
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गहलोल मजरे की गौशाला अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ी, ठंड एवं भूख से दो गोवंशीयों की हुई मौत,

आधा दर्जन गोवंशीय पशु जिंदगी मौत से कर रहे हैं संघर्ष, उनकी सांसे थमने का कुछ ही समय बाकी 

चार दर्जन गोवंशीय पशुओं में दो दर्जन गोवंशीय पशु बिना टैग के पशुशाला में मौजूद, पशुशाला बनी कब्रगाह

पशुशाला में कई माह से सफाई न होने से गंदगी का लगा अंबर

सहसवान (बदायूं) प्रदेश सरकार द्धारा पशुशाला में रह रहे पशुओं की उचित देखभाल के लिए समय-समय पर मॉनिटरिंग कराई जा रही है पशुशालाओं की देखभाल के लिए जिला अधिकारी द्वारा नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं|जो मॉनिटरिंग में पशुओं के रखरखाव खानपान के अलावा उनकी सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था,ठीक पाए जाने का फर्जी प्रमाण पत्र आला अफसरों को उपलब्ध कराकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।परंतु पशुशालाओं की व्यवस्था कुछ और ही बयां कर रही है ऐसा ही एक मामला सहसवान विकासखंड के ग्राम पंचायत होतीपुर के मजरा गहलोल पशुशाला का है।पशुशाला के देख-रेख का जिम्मा बदायूं की एक एनजीओ द्धारा संभाला जा रहा है।पशुशाला की जिम्मेदारी संभालने के लिए एनजीओ प्रबंधक ने पुराने केयरटेकर हटाकर बदायूं से दो केयरटेकर लगाए हैं।

प्रबंधक ने केयरटेकर तो सिर्फ इसलिए भेजे हैं कि वह पशुशाला के मुख्यद्धार पर बैंठकर यह देखते रहे की कोई भी पशु बाहर न जाने पाए।जबकि पशुशाला पर लोहे का गेट लगा हुआ है।जिसमें जंजीरों से ताला पड़ा रहता है।प्रबंधक ने बदायूं से भेज अपने दोनों केयरटेकरों को कार्य के लिए कोई भी सामान उपलब्ध नहीं कराया है उनके पास ना तो कोई फावड़ा है नहीं कोई परात नहीं कोई पानी पिलाने के बाल्टी इसके अलाबा पशु शाला में बने कमरों में सिर्फ एक तख्त पड़ा है दो खाली बोरे पड़े हैं कूड़ा कचरा गंदगी हटाने के लिए कोई भी ठेली तो छोड़िए बल्कि पशुओं को पीने के लिए पानी तक की व्यवस्था नहीं है पशुशाला में मौजूद चार दर्जन से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की हालत बद से बदतर हो रही है।पशुशाला कब्रशाला बनी हुई है।मौजूद गोवंशीय पशुओं में दो दर्जन से ज्यादा गोवंशीय पशु बिना टैग के मौजूद है।लोगों का कहना है कि उपरोक्त पशुशाला में जितने पशु मर जाते हैं उतने ही घुमंतू गोवंशीय पशु धर्मशाला बनाम पशुशाला में पहुंचा दिए जाते हैं।

पशुशाला में ठंड से बचाव हेतु प्रबंधक द्धारा आधी पशुशाला में हल्की वाली बरसाती लगा दी गई है जो हवा में हर पल उड़ती रहती है। जिससे प्रबंधक द्धारा ठंड से बचाव हेतु पशुओं को लगाई गई बरसाती से उनका कोई लाभ नहीं मिल रहा क्योंकि प्रबंधक ने बरसाती दो हिस्सों में डालकर बीच का हिस्सा लगभग 15 मी खाली छोड़ दिया है।जिस हवा का रुख पूरी पशुशाला को ठंडक का एहसास कराता रहता है।पशुशाला में कई माह से पशुओं का गोबर ना उठाने के कारण घुटनों घुटनों गंदगी कीचड़ फैली हुई है।इसी कीचड़ गंदगी में पशु दिनभर टहलते रहते हैं।जिसके कारण पशु शाला में बीती रात दो पशुओं की ठंड लगने के कारण मौत हो गई।जबकि दो पशु जिंदगी मौत से संघर्ष कर रहे हैं।उनकी मृत्यु में कुछ ही पल शेष बचे हैं इसके अलावा पशु शाला की कोई भी गोवंशीय पशु ऐसा नहीं है।जो बीमार न हो पशुशाला में पशुओं को उड़द की दाल की भूसी सुखी हुई बिना चोकर आटे के डाली जा रही है।बेचारे पशु सुखी उड़द की दाल की भूसी खाकर ही अपना जीवन काट रहे हैं।पशुशाला में पेयजल व्यवस्था न हो पाने के कारण पड़ोस में सरकारी पानी की टंकी के ट्यूबवेल से पानी की व्यवस्था की जा रही है।जबकि पशुशाला में रह रहे केयर-टेकरों को पानी की पीने रहने की कोई व्यवस्था मुकम्मल नहीं है।
ग्रामीणों ने चर्चा करते हुए कहा कि बीते 3 साल में उपरोक्त पशुशाला में लगभग 300 से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की मृत्यु हो चुकी है सभी गोवंशीय पशुओं को उपरोक्त पशु शाला में ही मिट्टी खोदकर दफनाया गया है।पशुशाला बनाम कब्रगाह में समय-समय पर आवारा कुत्ते भी गौशाला में दफन मृतक पशुओं का मांस को खींचते हुए ले जाते हैं यह दृश्य बहुत ही दर्दनाक होता है जगह-जगह पशु शाला में दफन गोवंशीय पशुओं को आवारा कुत्तों द्धारा खींचकर ले जाने के कारण उनके मांस हड्डी इधर-उधर पड़े हुए हैं। पशुशाला में पानी की टंकी ट्यूबवेल के पास दीवार नीची होने के कारण आवारा पशु पशुशाला में हमेशा विचरण करते रहते हैं।
पशुशाला की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रही एनजीओ के प्रबंधक ने बदायूं से राजेश दीपक नाम के दो केयरटेकर व्यवस्था संभालने के लिए रख तो दिए हैं।

परंतु उनके खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है और तो और दोनों केयरटेकर उपरोक्त संस्था का नाम भी नहीं बता सके सिर्फ इतना बताया कि उन्हें मुकर ने भेजा है।केयरटेकर राजेश दीपक ने बताया कि हमें₹10000 प्रतिमाह देने का वादा करके भेजा गया है।हम जब पशुशाला में पहुंचे तो हमें कोई भी ऐसा सामान उपलब्ध नहीं है।जिससे हम पशुशाला का संचालन कर सकें कोई फावड़ा नहीं है।गोबर उठाने के लिए कोई पल्ला ठेली परात झाड़ू नहीं है।तो हम क्या करें सिर्फ उड़द का भूसा पड़ा हुआ है।हम वही भूसा गायों को खिला रहे हैं।इसके अलावा हमारे पास कोई भी साधन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है अगर प्रबंधक सामान की व्यवस्था कर देते हैं।तो हम उसी हिसाब से कार्य करेंगे।।
ग्रामीण ने पशुशाला में पहुंचकर हंगामा किया तथा कहा की पशुशाला की व्यवस्था देख रही संस्था द्वारा कोई भी व्यवस्था न होने से पशु भूखे मरने के लिए जिंदगी मौत से संघर्ष कर रहे हैं सभी पशु बीमारी की स्थिति में है दो पशु मृत पड़े हैं जिन्हें आवारा कुत्ते उनके मांस को खींचकर अपना निवाला बना रहे हैं।ग्राम गहलोल की पशुशाला बनाम कब्रग्रह शाला में मृतक पशुओं को पशुशाला में ही दफन कर दिया जाता है।जिससे पशुशाला में बड़े पैमाने पर दुर्गंध फैल रही है।महामारी फैलने की आशंका प्रबल होती जा रही है।समय रहते अगर पशुशाला से मृतक पशुओं के अवशेष नहीं हटाए गए तो कभी भी पशु शाला में महामारी फैल सकती है।
पशुशाला में फैली भीषण गंदगी अब व्यवस्थाओं के बाबत जब ग्राम विकास अधिकारी वीरेंद्र पाल से बात की गई तो उन्होंने बताया की ढाई महीने पहले ग्राम गहलोल की पशुशाला की व्यवस्था की बागडोर अधिकारियों द्धारा बदायूं की एक संस्था को दे दी गई है। वहीं इसकी देखभाल कर रही है।इस बाबत खंड विकास अधिकारी से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया परंतु संपर्क नहीं हो सका।रिपोर्ट-एस.पी सैनी (समर इंडिया)

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