SSC ने परीक्षाओं में नार्मलाइजेशन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के अनुसार अलग-अलग शिफ्टों में कठिनाई स्तर भिन्न होने से उम्मीदवारों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए नार्मलाइजेशन आवश्यक है। यह प्रक्रिया अंकों को इस तरह समायोजित करती है कि सभी शिफ्टों के अभ्यर्थियों का मूल्यांकन एक समान हो। आयोग ने कहा कि इससे कठिन शिफ्ट वाले उम्मीदवारों को नुकसान नहीं होगा।
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कोई शिफ्ट अपेक्षाकृत आसान हो सकती है तो कोई कठिन। ऐसे में यदि सीधे अंकों की तुलना की जाए तो उम्मीदवारों के साथ न्याय नहीं होगा। इसी असमानता को दूर करने के लिए नार्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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आयोग ने बताया कि नार्मलाइजेशन का मतलब है उम्मीदवारों के अंकों को इस तरह समायोजित करना कि सभी शिफ्टों के अभ्यर्थियों के परिणाम एक ही पैमाने पर आंका जा सकें। यानी किसी उम्मीदवार के प्रदर्शन का मूल्यांकन सिर्फ उसकी शिफ्ट से नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा समूह से किया जाएगा।

