बीजिंग/नई दिल्ली, । China के विदेश मंत्री वांग यी 18 अगस्त को भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह यहां ‘स्पेशल रिप्रजेंटेटिव मैकेनिज्म’ के तहत भारत के अधिकारियों से अहम बातचीत करेंगे। इस दौरे को और भी खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसके कुछ ही दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी China के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। यह सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होगा।
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8 अगस्त को चीन ने प्रधानमंत्री मोदी के इस सम्मेलन में भाग लेने का खुले तौर पर स्वागत किया। China के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने शुक्रवार को कहा, “चीन प्रधानमंत्री मोदी का एससीओ तियानजिन सम्मेलन में स्वागत करता है। हमें विश्वास है कि सभी देशों के सहयोग से यह सम्मेलन एकजुटता, मित्रता और सार्थक परिणामों का आयोजन होगा। साथ ही, एससीओ एक नए चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें अधिक समन्वय, ऊर्जा और उत्पादकता होगी।”
गुओ ने यह भी बताया कि यह एससीओ के इतिहास का सबसे बड़ा सम्मेलन होगा, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी संघर्ष के बाद पहली चीन यात्रा होगी। उस संघर्ष ने भारत-चीन रिश्तों में बड़ी दरार पैदा कर दी थी।
China देशों के बीच करीब 3,500 किमी लंबी एलएसी पर सहमति के साथ गश्त को लेकर समझौता हुआ
हालांकि, अब दोनों देशों के बीच करीब 3,500 किमी लंबी एलएसी पर सहमति के साथ गश्त को लेकर समझौता हुआ है। यह चार साल पुराने सीमा विवाद को हल करने की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है। जुलाई 2025 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर चीन गए थे। वहां उन्होंने एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया और साथ ही China के विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की।
जून 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी चीन में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए। हालांकि, भारत ने उस बैठक के संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि उसमें आतंकवाद पर भारत की चिंताओं को शामिल नहीं किया गया था।

