*नवनियुक्त एसडीएम ने बाढ़ ग्रस्त दो गांव का भ्रमण किया तथा आश्रय स्थलों में रह रहे पीड़ितों से मिलकर उनका दुख दर्द सुना,*
“तहसील क्षेत्र के 7 से ज्यादा ग्राम पूर्ण रूप से जलमग्न कई गांव में आवागमन के लिए साधन उपलब्ध न होने से पीड़ितों को हो रही है परेशानी”
“कई स्कूल पंचायत घर बाढ़ के पानी से लवालव, शिक्षण कार्य पूर्ण रूप से चौपट”

सहसवान( बदायूं )तहसील मैं बहने वाली गंगा नदी में बीते कई दिनों से तेजी से बड़े जलस्तर ने क्षेत्र में तबाही मचा कर सात गांव की आबादी को अपने आगोश में समेट लिया है जबकि दो दर्जन से ज्यादा ग्रामों की हजारों एकड़ भूमि में खड़ी फसल पूर्ण रूप से जलमग्न हो गई है जो किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है नवनियुक्त एसडीएम सईं आश्रित शाकमुरी ने पदभार संभालते ही अधीनस्थों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया तथा अधीनस्थों को निर्देश दिए कि वह बाढ़ की स्थिति पर नजर रखते हुए प्रभावित होने वाली परिजनों को किसी भी प्रकार की कोई समस्या न होने पाए इसका वह विशेष ध्यान रखें। वही गंगा नदी के तेजी से बड़े जलस्तर ने तौफी नगला, तेलिया नगला, खागी नगला, गिरधारी नगला, भमरोलिया, सूरत नगला सोन शिवारक, गांव की आबादी पूर्ण रूप से जलमग्न हो गई है गांव के गांव टापू बन गए हैं वहीं एक दो गांव को छोड़कर किसी भी गांव में नाव की व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं कराई गई है जिसके द्वारा पीड़ितों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है गांव में भारी जल भराव के चलते पीड़ित परिवार मकान की छत पर खाना बना रहे हैं तो वही चंद पीड़ित परिवार आश्रय स्थलों में परिवार सहित पशुओं को लेकर पहुंच गए हैं प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई बरसाती को पीड़ित परिवारों ने नाकाफी बताते हुए कहां की इससे तो बेहतर था प्रशासन उन्हें बरसाती उपलब्धि नहीं कराता 2 मी उपलब्ध कराई गई बरसाती से वह क्या अपने परिवार का आशियाना बनाएंगे या अपने पशुओं का, गंगा नदी के पानी ने उपरोक्त ग्रामों में हजारों कुंतल खाद्यान्न सामग्री नष्ट कर दी वहीं कई परिवारों में तो घरेलू संपत्ति इस लायक नहीं रही कि उसका प्रयोग किया जा सके चारों तरफ जल ही जल होने से संक्रामक रोगों की संभावना भी प्रबल हो गई है तथा कई लोग संक्रामक रोगों से पीड़ित है परंतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक कोई भी स्वास्थ्य कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है नहीं उन्होंने पीड़ितों के स्वास्थ्य संबंधी कोई जानकारी हासिल की है यही हाल पशुओं का भी है पशुओं में भी संक्रामक रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। 

सहसवान सहसवान तहसील क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त ग्रामों में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए स्थापित की गई तीनों बाढ़ चौकिया में तैनात किए गए कर्मचारी ड्यूटी से नदारत रह रहे हैं तीनों चौकिया पूर्ण रूप से खाली पड़ी है चौकिया पर तैनात कर्मचारी बाढ़ प्रभावित परिवार के संपर्क में है तथा उनसे घर बैठे ही अपने मोबाइल पर बाढ़ की स्थिति की पाल-पाल की रिपोर्ट लेकर अधिकारियों को घर बैठे दे रहे हैं जबकि अधिकारी यह समझ रहे हैं की बाढ़ चौकी पर तैनात किए गए कर्मचारी पूर्ण रूप से सतर्कता सजाकता तथा निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी कर रहे हैं परंतु चौकियो पर कोई भी कर्मचारी नहीं मिला पीड़ित परिवारों ने बताया की चौकियौ पर कोई भी कर्मचारी नहीं आता है सिर्फ मोबाइल पर ही जानकारी हासिल करते रहते हैं की बाढ़ की स्थिति क्या है।
वीरसहाय नगला, खागी नगला में तो प्राथमिक विद्यालय पूर्ण रूप से जलमग्न है तथा विद्यालय में रखा शिक्षण सामग्री भी पूर्ण रूप से नष्ट हो गई ग्राम खागी नगला में गंगा नदी से मात्र चंद कदम की दूरी पर बने ग्राम पंचायत कार्यालय भी पूर्ण रूप से जलमग्न है इधर वीर सहाय नगला के पीड़ित परिवारों ने एक सुर में बताया कि वह बीते कई दशकों से प्रतिवर्ष गंगा नदी में आई बाढ़ की विभीषका का दंस सहते चले आ रहे हैं उनको प्रतिवर्ष हजारों रुपए की हानि होती है कई महीने परिवार भी परेशान रहता है तथा पशुओं को भी भारी कष्ट उठाना पड़ता है हम लोग कई बार प्रशासन से अनुरोध भी कर चुके हैं कि प्रशासन हमें आवास की भूमि उपलब्ध करा दे तो हम परिवार सहित वहां परिवार सहित बसने के लिए तैयार हैं परंतु हमें प्रशासन के अधिकारी प्रतिवर्ष बाढ़ के समय आश्वासन देते हैं कि तुम्हें अन्य स्थानों पर स्थापित कर दिया जाएगा परंतु उनके यह आश्वासन खोखले साबित होते हैं उनके यह आश्वासन सिर्फ गांव में बाढ़ का पानी भर होने तक पूरे होते दिखाई देते हैं उसके बाद तो कोई भी राजस्व कर्मचारी अधिकारी उपरोक्त क्षेत्र में आने की जहमियत नहीं उठाता है। जो एक चिंता का विषय है कई लोगों ने रोते हुए बताया कि वह प्रतिवर्ष अपने सामने ही अपने परिवार को गंगा नदी की बाढ़ में नष्ट होता हुआ देखते हैं तो उन्हें दुख होता है उन्होंने कहा कि उनका सुकून मात्र नो माह रहता है लगभग तीन महा वह बाढ़ द्वारा पहुंचाई गई पीड़ा का दर्द सहन करते हैं परंतु उनके इस दर्द को कोई भी राजनीतिक व्यक्ति जनप्रतिनिधि के अलावा शासन प्रशासन का कोई भी अधिकारी मुक्ति नहीं दिलाना चाहता चुनाव के समय तो वोट मांगने आए राजनीतिक प्रत्याशी एवं नेता बड़े-बड़े लंबे चौड़े आश्वासन देकर आश्वासन की घुट्टी पिलाते हैं उसके बाद वह 5 साल तक मुड़ के भी नहीं देखते।
इधर पीड़ित परिवारों ने बताया कि प्रशासन द्वारा उन्हें जो भी खाद्य सामग्री के पैकेट उपलब्ध कराए गए वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा उन्हें जो भी बरसाती उपलब्ध कराई गई उसे बरसाती में तो एक भी व्यक्ति अपना आशियाना बनाकर नहीं रख सकता तो पूरा परिवार 2 मी बरसाती में कैसे अपना आशियाना बना लेगा यह एक विचारणीय प्रसन्न है।
नवनियुक्त एसडीएम साइ आश्रित शकमुरी सहसवान एसडीएम कुर्सी का पदभार संभालते ही तत्काल तहसीलदार राकेश कुमार व राजस्व टीम के साथ बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में पहुंचे जहां राजस्व टीम नवनियुक्त एसडीएम को खागी नगला
भमरोलिया आश्रय स्थलों पर पहुंचे जहां उन्होंने पीड़ित परिजनों से वार्ता की तथा अधीनस्थों को मौके पर ही निर्देश दिए कि वह बाढ़ पर सतर्क एवं सजक रहे तथा बाढ़ के पानी की स्थिति से प्रभावित परिवारों को जानकारी देते रहें कि वह बाढ़ के पानी में छोटे बच्चों को न जाने दें उन पर नजर रखें साथ ही उन्होंने अधीनस्थों को निर्देश दिए कि वह प्रभावित परिवारों को किसी भी प्रकार की तकलीफ ना होने दें तथा तकलीफ होने पर उन्हें जो भी संभव मदद हो सकती है उन्हें तत्काल उपलब्ध कराए इसमें किसी भी प्रकार की कोई भी लापरवाही बरदाश्त नहीं की जाएगी।
तेलिया नगला, तोफी नगला, वीर सहाय नगला खागी नगला बमरोलिया गिरधारी नगला सूरत नगला सोन शिवारक गांव की आबादी पूर्ण रूप से जलमग्न है तो वही दो दर्जन से ज्यादा गांव की हजारों एकड़ भूमि में खड़ी फसल पूर्ण रूप से जलमग्न होकर नष्ट हो गई है पशुओं के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो रही है तो वही कई ग्रामों में आवागमन के लिए प्रशासन द्वारा नाव की व्यवस्था न किए जाने से लोगों को आवागमन में जान जोखिम में डालकर गंगा नदी के गर्दन तक पानी में डूब कर आवागमन करना पड़ रहा है जो एक चिंता का विषय है ।

