देवभूमि (उत्तराखंड)

जोशीमठ के धंसने की आखिर क्या है वजह?

What is the reason behind the collapse of Joshimath

इस समय सभी को मालूम है कि जोशीमठ में जो आज देखने को मिल रहा है वो पहाड़ के एक हिस्से में नहीं बल्कि उत्तराखंड के कई हिस्सों की बनती तस्वीर है. इसके लिए कई सारी चीज़ें ज़िम्मेदार हैं. जानकारों की मानें तो उत्तराखंड में पहाड़ों के खिसकने का जो सिलसिला शुरू हुआ है उसके लिए सबसे बड़ी वजह है पहाड़ों का दोहन और दूसरी तरफ सरकार की उदासीनता है.

अगर हम जानकारों की मानें तो इन परिस्थितियों के पीछे जो बड़ी वजहें हैं वो कुछ इस तरह हैं

आपको बतादें कि सबसे बड़ी वजह है जो इस पूरे मामले में नज़र आती है वह है पहाड़ों का कटाव. दरअसल चारधाम मार्ग यानी उत्तराखंड के चार धाम को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण हो या फिर गांव-गांव को जोड़ने वाली सड़कें हो. जिस रफ़्तार से सड़क बनाने का काम किया जा रहा है और इस दौरान बड़ी-बड़ी मशीनों से पहाड़ों में ड्रिलिंग का काम किया जा रहा है उससे पहाड़ों में कंपन पैदा होता है और इसी कंपन की वजह से पहाड़ लगातार कमजोर होते जा रहे हैं. यही वजह है कि अक्सर बारिश होने पर उत्तराखंड में जगह-जगह लैंडस्लाइड और पहाड़ों के टूटने की तस्वीरें नज़र आने लगती हैं.

वहीँ दूसरी और अगर देखा जाए तो दूसरी वजह है सड़क बनने के दौरान जो मलबा जमा होता है उस मलबे को लापरवाही में सीधे नदी में फेंक दिया जाता है. जिसके बाद नदी अपना रास्ता बदलती है और भूमि का कटाव शुरू हो जाता है. साथ ही नदी का स्तर भी बढ़ने लगता है. यही वजह है कि अक्सर बरसात के दिनों में गांव के गांव नदी में समाते हुए नज़र आते हैं. जबकि NGT ने यह आदेश पहले से ही दिया है कि सड़क बनाते समय जो पत्थर और बाकी मलबा जमा होता है उसे किसी डंपिंग ग्राउंड में डाला जाए. इस तरीके से नदी में मलबा डालने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है. बावजूद इसके प्रशासन की अनदेखी के बीच लगातार मलबा नदियों में बहाया जा रहा है. जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने कभी ध्यान ही नहीं दिया.

वहीँ दूसरी ओर जानकार यह भी कहते हैं कि पहले से स्लाइड जोन में तब्दील हो चुके पहाड़ों के नीचे जब NTPC जैसे प्रोजेक्टों के लिए खुदाई होती है तो उसकी वजह से पहाड़ का ऊपरी हिस्सा कमजोर होने लगता है. जिसको लेकर समय-समय पर सरकार को चेताया भी गया. बावजूद इसके सरकार की नज़रअंदाज़ी कुछ इस तरह रही कि अब जोशीमठ जैसा बड़ा उदाहरण हम सबके सामने है.

इतना ही नहीं पहाड़ों के दरकने की एक सबसे बड़ी वजह जंगलों का खत्म होना भी है. सड़क से लेकर भवनों के निर्माण के लिए पेड़ लगातार काटे जा रहे हैं. पहले से पलायन की मार झेल रहा उत्तराखंड काफ़ी वीरान हो चुका है. जंगल, खेत काफ़ी संख्या में पहले ही ख़त्म हो चुके हैं. जिन जगहों पर बसावट है भी वहां पर विकास के नाम पर होटल, ढाबे या फिर दूसरे तरह के कंस्ट्रक्शन लगातार होते जा रहे हैं, जिसकी वजह से पेड़ भी खूब काटे जा रहे हैं. इसका नुकसान ये होता है कि मिट्टी की पकड़ कमजोर होने लगती है और जमीन धंसने लगती है.

Source : abp news

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